जिले भर में कुछ सालों के भीतर रेलवे ट्रैकों पर हुए हादसों को लोग भूल चुके हैं। तभी तो उन्हें बंद रेलवे क्रॉसिंग को भी जान जोखिम में डालकर पार करने में गुरेज नहीं है। रेलवे फाटक बंद होने के बाद पांच मिनट का इंतजार करने की बजाय रेलिंग के नीचे से वाहन पार करने में लोग नहीं हिचकते। ऐसी ही स्थिति शनिवार के ककराही स्थित रेलवे फाटक पर देखने को मिली। जहां लोग गेट बंद होने के बाद भी नीचे से पैदल, साइकिल, बाइक पार कर उस तरफ जाते देखे गए। पूर्व में हादसों के बावजूद भी लोग जागरूक नहीं हैं।
मालूम हो कि दो साल पूर्व डाला पुलिस चौकी क्षेत्र के गजराज नगर में स्थित बिल्ली रेलवे क्राॅसिंग के समीप रात के समय पलामू एक्सप्रेस की चपेट में आने से बाइक सवार अरविंद पाठक (42) की मौत हो गई। रेलवे फाटक बंद होने के कारण बाइक सवार बगल के रास्ते से निकलने कोशिश कर रहे थे। उसी वक्त ट्रेन की चपेट में आ गए। बाइक ट्रेन में फंसकर घटनास्थल से 500 मीटर दूर चली गई ओर वह चूर-चूर हो गई।
साढ़े तीन साल पहले अनपरा क्षेत्र के मिर्चाधुरी रेलवे स्टेशन पर पूर्व में मौजूद क्राॅसिंग को लोहे का पिलर गाड़कर बंद किया गया था। आसपास के ग्रामीणों ने अपनी सहूलियत के लिए क्रासिंग से थोड़ा किनारे हटकर रास्ता बना लिया। इसी जगह से खजुरा निवासी बोलेरो चालक निगम केशरी बरात वापस छोड़ अपने घर जा रहा था। क्रासिंग पर ट्रैक के बीच उसकी बोलेरो फंस गई। वाहन निकल पाता इससे पहले ही यहां से चोपन से गढ़वा की तरफ जा रही पलामू लिंक एक्सप्रेस आकर टकरा गई।