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आत्मा के पास पहुंचने और आत्मशुद्धि का पर्व है पर्यूषण : नरेश जैन

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सोनभद्र। जैन साधना भवन में चल रहे पर्यूषण पर्व के क्रम में मंगलवार को दिल्ली से पधारे जैन श्रावक नरेश जैन ने श्रद्धालुओं को पर्व की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि पर्यूषण पर्व का अर्थ आत्मा के पास पहुंचना और एक साथ आना है। यह पर्व मनुष्य को बाहरी दुनिया से नाता तोड़कर अपने भीतर की ओर जाने और अपने कार्यों का अवलोकन करने की प्रेरणा देता है। श्रावक नरेश जैन ने कहा कि जैन परंपरा में पर्यूषण पर्व आठ दिनों तक मनाया जाता है। यह पर्व उत्तम क्षमा और आत्मशुद्धि पर आधारित है। इसमें व्यक्ति स्वयं को क्षमा करने के साथ ही दूसरों को भी क्षमा करने की भावना विकसित करता है। कल्पसूत्र के वाचन में भी इन महत्वपूर्ण बातों का वर्णन मिलता है। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के संदेशों में अहिंसा, सत्य, अचौर्य, अपरिग्रह और ब्रह्मचर्य जैसे पांच प्रमुख सिद्धांतों पर जोर दिया गया है।उन्होंने बताया कि सच्चा जैन वही है, जो अपने जीवन में हिंसा से बचे, किसी भी प्रकार का अनैतिक कार्य न करे, आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह न करे और ब्रह्मचर्य का पालन करे। जैन संत इन सिद्धांतों का अपने जीवन में अनुसरण करते हैं। उन्होंने संवत्सरी पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व आत्ममंथन, क्षमाभाव और आपसी सद्भाव का संदेश देता है। इस दौरान श्रद्धालुओं को अपने आचरण की समीक्षा कर जीवन में सुधार लाने की प्रेरणा दी गई। कार्यक्रम के अंत में मंगल पाठ किया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं में प्रसाद का वितरण किया गया।
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