पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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पुलिस के मुताबिक शाकिर ने बताया कि पति-पत्नी मजदूरी कर परिवार चलाते हैं। पत्नी गर्भवती हुई तो पड़ोस में रहने वाले सत्यनारायण गुप्ता व मानकुंवर ने घर आकर गरीबी के कारण बच्चे की सही परवरिश न हो पाने का हवाला देते हुए उसे बेचने का प्रस्ताव रखा। दोनों ने 45 हजार रुपये में बच्चा अपने एक रिश्तेदार को सौंपने की बात कही। उनकी बात सुनकर पत्नी उर्मिला तैयार हो गई।
गत 21 नवंबर की रात एक निजी अस्पताल में उर्मिला ने प्रसव के बाद पुत्र को जन्म दिया। अगले ही दिन मानकुंवर, उसका पति सत्यनारायण गुप्ता व दामाद शिवशंकर गुप्ता एक अन्य बुजुर्ग दंपती के साथ नेमना स्कूल के पास उन्हें मिले। तय सौदे के अनुसार उसे 26 हजार रुपये पेशगी के तौर पर दिए। शेष पैसा बाद में देने को कहा, लेकिन अब तक उन्होंने बाकी राशि भी नहीं दी है।
बाल संरक्षण इकाई की टीम शाकिर के साथ मानकुंवर के पास पहुंचे तो उसने बच्चा न होने से परेशान रिश्तेदार को बच्चा दिलवाने की बात स्वीकार की। टीम ने उनके बताए पते बभनी के भंवर गांव पहुंचकर बच्चा बरामद किया। नवजात को जन्म देने वाले मां-बाप, बिचौलिया दंपती उसके दामाद समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। बीजपुर एसओ पंकज सिंह ने बताया कि पांचों को जेजे एक्ट (किशोर न्याय अधिनियम ) सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसे उन्हें जेल भेज दिया गया।