सोनभद्र। जिले के लोगों को जल्द ही प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए निजी ब्लड बैंकों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। वर्षों के इंतजार के बाद जनवरी में मेडिकल काॅलेज से संबंद्ध ब्लॅड बैंक में कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट का संचालन शुरू हो जाएगा।
जिले के सभी निजी और सरकारी अस्पतालों में मिलाकर पांच सौ यूनिट खून की खपत है, जबकि रक्तदान करने वालों की संख्या काफी कम है। अभी तक जनपद में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन लैब न होने से मरीजों व उनके तीमारदारों को वाराणसी समेत अन्य जगहों पर प्लेटलेट्स और प्लाज्मा के लिए दौड़ लगानी पड़ती है।
प्लेटलेट्स के लिए लोगों को निजी अस्पताल में महंंगी कीमत देनी होती है। इस समस्या को दूर करने के लिए करीब तीन साल पहले जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट की स्थापना की प्रक्रिया शुरू हुई थी। जिला अस्पताल को एक अप्रैल 2023 से स्वशासी मेडिकल कॉलेज में संबद्ध कर दिया गया है। इसके बाद से राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की टीम के लिए कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट प्राथमिकता में है। इसके शुरू होने पर ब्लड से आरबीसी, प्लेटलेट्स और प्लाज्मा अलग किया जा सकेगा। डेंगू आदि के गंभीर मरीजों को इलाज के लिए वाराणसी आदि जगहों पर नहीं जाना होगा। मशीनें पूरी आने के बाद लाइसेंस की प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है। जिसके बाद जिला औषधि विभाग की फाइनल रिपोर्ट लगते ही लाइसेंस मिल जाएगा। जिसके बाद यूनिट शुरू हो जाएगी। इसे जनवरी माह से शुरू करने की तैयारी है।
अब एक यूनिट ब्लड तीन मरीजों के काम आएगा
जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की वर्तमान में क्षमता 500 यूनिट ब्लड रखने की है। प्रतिदिन करीब 22-25 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट न होने से अभी तक एक यूनिट ब्लड एक ही मरीज के काम आता है। प्लेटलेट्स और प्लाज्मा की कमी होने पर भी मरीज को पूरा ब्लड दिया जाता है। ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट में रक्त की एक यूनिट को तीन अलग-अलग भाग में बांटा जाएगा। जरूरतमंदों को रक्त के जरूरी तत्व ही दिए जाएंगे। घायलों और सिजेरियन केस में पीड़ितों को पूरा ब्लड चढ़ाने की जरूरत पड़ती है।
ब्लड बैंक नहीं अब होगा ब्लड सेंटर
जिले के सभी सरकारी और निजी ब्लड बैंक का नाम बदलने वाला है। इसे लेकर निर्देश भी जारी कर दिए गए है। इसके तहत ब्लड बैंक को अब ब्लड सेंटर के नाम से जाना जाएगा। इसकी प्रक्रिया शुरू हो गई है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि नए नाम को पेंटिंग कराने के साथ ही मुहर और पर्चे भी बनवाए जा रहे हैं।
कंपोनेंट ब्लड सेपरेशन यूनिट के लाइसेंस के लिए फाइनल निरीक्षण हो गया है। व्यवस्थाएं दुरूस्त हो गई हैं। औषधि विभाग के रिपोर्ट लगाते ही लाइसेंस मिल जाएगा। जनवरी से संचालन की तैयारी है। -डॉ. अशोक कुमार, ब्लड बैंक प्रभारी।