आचार्य प्रशिक्षण वर्ग में शामिल पदाधिकारी एवं आचार्यगण। स्रोत : स्वयं
घोरावल। विश्व हिंदू परिषद काशी प्रांत की तरफ से संचालित गिरिवासी वनवासी सेवा प्रकल्प घोरावल के सभा कक्ष में आयोजित तीन दिवसीय आचार्य प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम रविवार को संपन्न हो गया। इसमें घोरावल के साथ-साथ महर्षि वाल्मीकि सेवा संस्थान नौगढ़ के आचार्य भी शामिल रहे। समारोह की अध्यक्षता प्रकल्प के अध्यक्ष हिमांशु कुमार सिंह ने की। मुख्य अतिथि के रूप में बड़हर राज्य के राजा देवांश क्रांति ब्रह्म शाह ने मुख्य रूप से आशीर्वचन दिए। उन्होंने कहा कि संस्कारी बालक ही संस्कारी राष्ट्र के भविष्य होते हंै। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के संयुक्त क्षेत्र सेवा प्रमुख राधे श्याम द्विवेदी ने बताया कि आज के परिवेश में शिक्षा के साथ-साथ संस्कार भी बहुत आवश्यक है। वहीं राजा देवांश क्रांति ब्रह्म शाह ने कहा कि संस्कारी बालक ही संस्कारी राष्ट्र के भविष्य हैं। वहीं शिक्षकों ने शिक्षण कार्य में राष्ट्रीय प्रेम सेवा की भावना एवं पारिवारिक व सामाजिक मूल्य मूल्य की स्थापना पर बल दिया। प्रशिक्षण वर्ग 12 सत्रों में आयोजित किया गया, जिसमें तीन विद्यालयों एवं दो छात्रावासों के कुल 22 आचार्य एवं आचार्य बहनें प्रशिक्षण में प्रतिभागी बनीं। इस मौके पर विद्याशंकर पांडेय, जिलाध्यक्ष प्रकल्प मंत्री विद्याभूषण दुबे राकेश, सेवा प्रमुख दो अंबालिका प्रयागराज गणेश देव पांडेय, अर्जुन प्रसाद आदि उपस्थित रहे।