गर्मी के दिनों में धंधरौल बांध से नहरों के साथ ही बेलन नदी में पानी छोड़ा जाता था। ताकि पशु-पक्षियों को पीने के पानी की दिक्कत न हो। मगर मई माह बीतने के बाद भी अभी पानी नहीं छोड़ा जा सका है। इस बार गर्मी में पानी नहीं छोड़े जाने से नदी, नहर और नाले पानी विहीन हैं। स्थिति यह है कि बेलन नदी में धूल उड़ रही है। सोनांचल में 400 से अधिक राजस्व गांवों से होकर निकली बेलन से करीब 70 से 80 हजार हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होती है। बेलन नदी इतने गांव के लोगों के लिए जीवन रेखा मानी जाती है। मगर इस बार गर्मी से पहले इसके सूख जाने से क्षेत्र के लोगों की नींद उड़ गई है। बुजुर्गो का कहना है कि चाहे जितनी भी भयानक गर्मी पड़ी हो बेलन नहीं सूखती थी, इस बार इसके सूख जाने से हालात बदतर हो गए हैं। नौगढ़ क्षेत्र से पशुओं को लेकर आने वाले पशुपालक इस बार नदी के सूख जाने के कारण परेशान है। नौगढ़ क्षेत्र से पशुओं को लेकर आए रामरक्षा यादव का कहना है कि बेलन नदी के सूखने की वजह से पशुओं के पीने के पानी को लेकर काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। निजी बोर चलवाकर पीने के पानी की व्यवस्था कराई जा रही है। बीते वर्षो में घाघर मुख्य नहर के जरिए बेलन नदी में पानी आने के कारण पशुपालकों को काफी राहत होती थी। पशुपालकों ने पीने के पानी की समस्या को देखते हुए नदी, नाले एवं नहरों में पानी छोड़े जाने की मांग की। एमसीडी के सहायक अभियंता राजीव कुमार ने बताया कि धंधरौल बांध में सिर्फ 8.9 फीट पानी है। ऐसे में बांध से पानी नहीं छोड़ा जा सकेगा। बांध के पानी को राबर्ट्सगंज पुनर्गठन पेयजल योजना के जरिए नगर में जलापूर्ति के लिए रिजर्व रखा गया है। अगर अच्छी बारिश नहीं हुई तो आगे स्थिति और भी भयावह हो सकती है।