अस्पतालों, क्लीनिक और पैथॉलाजी के नवीनीकरण के नियमों में बदलाव और सख्ती के कारण करीब आधे से अधिक पैथोलॉजी और अस्पतालों के पंजीकरण निरस्त होने का खतरा मंडराने लगा है। तय सीमा बीतने के बावजूद पचास फीसदी अस्पताल और पैथोलॉजी के नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किए गए हैं।
जिले में मानक के विपरीत अस्पतालों के संचालन, उपचार में लापरवाही के मामले सामने आते रहे हैं। बिना चिकित्सकों के अस्पतालों के संचालन के कई उदाहरण भी सामने आए हैं। पंजीकरण और नवीनीकरण के नियम सार्वजनिक करते हुए अस्पताल, पैथोलॉजी और क्लीनिक आदि के लिए 30 अप्रैल तक आवेदन करने को कहा गया था।
विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 97 अस्पताल व क्लीनिक और करीब 45 पैथोलॉजी सेंटरों का पंजीकरण है। तमाम हिदायतों के बावजूद भी 142 अस्पतालों, क्लीनिक और पैथोलॉजी में से महज 75 ने ही ऑनलाइन आवेदन कर अपने कागजात विभाग में जमा कराए हैं।
आधे ने तय सीमा के बावजूद दस्तावेज जमा नहीं कराए हैं। ऐसे में इनका पंजीकरण स्वत: निरस्त होने का खतरा मंडराने लगा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो नियमों पर सख्ती के कारण जुगाड़ की व्यवस्था से संचालित अस्पताल और पैथोलॉजी ने आवेदन करने से हाथ पीछे खींच लिए हैं।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिन अस्पतालों, क्लीनिक और पैथोलॉजी सेंटरों ने 30 अप्रैल से पूर्व नवीनीकरण के लिए आवेदन नहीं किया है। अब उन्हें नए सिरे से पंजीकरण कराना होगा। ऐसा करने में नाकाम रहने वाले अस्पतालों पर सील होने का खतरा भी मंडराने लगा है।