शकनिगर क्षेत्र में छोटे टैंकरों से ट्रेलरों भरा जा रहा डीजल।
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शक्तिनगर। यूपी का सस्ता डीजल मध्यप्रदेश के सीमाचंल क्षेत्रों में पहुंचने के मामले में जिलापूर्ति अधिकारी (डीएसओ) के पत्र पर पखवारे भर बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने से जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। स्थिति यह है कि तेल के खेल का दायरा कम होने के बजाय बढ़ता जा रहा है।यूपी से प्रतिदिन छोटे टैंकरों से मध्यप्रदेश पहुंचाए जा रहे हजारों लीटर सस्ते डीजल का मामला बीते माह सार्वजनिक हुआ था। इसी के बाद डीएसओ ने इसे उत्तर प्रदेश डीजल आपूर्ति अधिनियम व पंप संचालन की सेवा शर्तों का उल्लंघन माना। डीएसओ राकेश तिवारी ने 15 जुलाई को एसडीएम दुद्धी को आपूर्ति, राजस्व व पुलिस की संयुक्त टीम गठित कर प्रभावी कार्रवाई को कहा। पत्र में यह भी कहा गया कि यूपी का सस्ता डीजल अनपरा, शक्तिनगर व बीजपुर में स्थित पंपों से एमपी में नहीं पहुंचे इसके लिए की जाने वाली कार्रवाई में क्षेत्रीय आपूर्ति अधिकारी व तेल कंपनियों (आईओसी, एचपीसी व बीपीसी) के क्षेत्रीय विक्रय अधिकारियों को शामिल किया जाए। पखवारे भर से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी डीएसओ के पत्र पर कोई ठोस पहल नहीं होने से पूरी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। बताते चलें कि यूपी व एमपी के वैट टैक्स में विषमता डीजल की कीमत में अंतर पैदा कर रहा है। यूपी में डीजल छह रूपये लीटर सस्ता है। छह रूपये प्रति लीटर सस्ता डीजल हासिल करने के लिए एमपी के कारोबारियों ने यूपी का रूख अख्तियार किया है। इस मामले में अभी तक कार्रवाई नहीं होने पर डीएसओ राकेश तिवारी ने कहा कि नए सिरे से मामले पर मंगलवार से गंभीरता दिखाई जाएगी।