एआरटीओ के फर्जी रिलीज आर्डर पर सैकड़ों वाहनों को थाने से छुड़ा ले जाने का मामला गरमा गया है। एआरटीओ विभाग से जुड़े कई अधिकारी व कर्मचारी खुद का गला बचाने के लिए कागज में हेराफेरी करने में जुट गए हैं। बृहस्पतिवार को दफ्तर में पुरानी पत्रावलियां खंगाली जा रही थीं। यही कारण है कि आरटीओ के स्पष्ट निर्देश के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज कराने के लिए पुलिस को तहरीर तक नहीं दी गई है।
उप संभागीय परिवहन विभाग लोढ़ी बिचौलियों का अड्डा बन गया है। पिछले कई सालों से परिवहन विभाग में कुंडली मारकर बैठे कई अधिकारी और कर्मचारी नियमों को ताख पर रखकर भी कई काम करने से गुरेज नहीं कर रहे। इसकी जांच होने पर सच्चाई सामने आने लगी है। आरटीओ के निर्देश पर एआरटीओ मिर्जापुर ने सोनभद्र के एआरटीओ कार्यालय में की जा रही गड़बड़ी की जांच की तो पता चला कि फर्जी आर्डर के जरिये परिवहन, खनन समेत अन्य विभागों द्वारा विभिन्न थानों में बंद सैकड़ों वाहनों को रिलीज करा दिया गया। एआरटीओ अनिल तिवारी ने कहा कि एआरटीओ प्रशासन पीएस राय को मामले से डीएम-एसपी को अवगत कराते हुए सभी फर्जी रिलीज आर्डर वाले मामले में विधिक मुकदमा दर्ज कराने को कहा है। इसके बावजूद एआरटीओ द्वारा प्रकरण में कार्रवाई को लेकर संजीदगी नहीं दिखाई जा रही है।
मिर्जापुर के आरटीओ प्रवर्तन राजेश कुमार वर्मा ने भी जिले के एआरटीओ प्रवर्तन द्वितीय को पत्र लिखकर वाहनों को फर्जी तरीके से अवमुक्त कराने के प्रकरणों में आवश्यक विधिक कार्रवाई की बात कही है। सूत्रों की मानें तो बृहस्पतिवार को एआरटीओ कार्यालय लोढ़ी में पिछले कुछ माह में कितने सही और कितने का गलत ढंग से रिलीज आर्डर तैयार किया है समेत अन्य पत्रावलियों की जांच पड़ताल करने में कर्मी लगे रहे। इस दौरान वह कागजात को दुरुस्त करने में भी जुटे रहे, जिससे उनकी कमियां सामने न आने पाए।