ओबरा। अस्सी के दशक तक प्रदेश का सबसे बड़ा विद्युत उत्पादन क्षेत्र रहा फिर से एनर्जी हब बनेगा। ओबरा-डी के रूप में 1600 मेगावाट के अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट स्थापित होने के बाद ओबरा में बिजली उत्पादन की क्षमता 3920 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। फिलहाल यहां एक हजार मेगावाट की इकाइयां क्रियाशील हैं। 1320 मेगावाट की निर्माणाधीन ओबरा-सी परियोजना अंतिम चरण में है। एनटीपीसी के साथ राज्य उत्पादन निगम के इस संयुक्त प्रोजेक्ट पर करीब 18 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
मंगलवार को लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में कैबिनेट ने सोनभद्र के ओबरा में ओबरा-डी परियोजना के निर्माण को मंजूरी दी। आठ सौ मेगावाट की दो इकाइयाें वाली इस परियोजना को एनटीपीसी और राज्य उत्पादन निगम संयुक्त रूप से पूरा करेंगे। यह उत्तर प्रदेश का पहला अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट भी होगा।
आठ सौ मेगावाट की पहली इकाई 50 महीने और इतनी ही क्षमता की दूसरी इकाई के 56 महीने में पूरा होने की संभावना है। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 18 हजार करोड़ अनुमानित है। इससे 2200 लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। तत्कालीन उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद की सबसे पुरानी तापीय परियोजना रही ओबरा के चल रहे विस्तारीकरण के तहत प्रस्तावित ओबरा-डी के निर्माण के बाद ओबरा परियोजना की कुल क्षमता 3920 मेगावाट हो जाएगी। ओबरा-डी के लिए एनटीपीसी की ओर से ओबरा कॉलोनी परिसर के लिहाज से फिजिबिलिटी रिपोर्ट व डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाई गई है। योजना के तहत परियोजना कॉलोनी के सभी सेक्टरों का टोपोग्राफिकल सर्वे शुरू हो चुका है। परियोजना सूत्रों के अनुसार उत्पादन निगम की ओर से परियोजना काॅलोनी के सेक्टर 1, 2, 3, 4, 8 एवं 9 का टोपोग्राफिकल सर्वे कराया गया है। इस सर्वे का उपयोग प्रस्तावित ओबरा-डी के लिए बनाने वाले फिजिबिलिटी व डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट में किया जा रहा है।
सबसे बड़ी परियोजना थी ओबरा
कुल 2630 मेगावाट की अनपरा तापीय परियोजना की स्थापना से पहले ओबरा राज्य विद्युत परिषद की सबसे बड़ी परियोजना थी। इसकी कुल क्षमता 1550 मेगावाट थी। इसमें ओबरा-ए परियोजना से कुल 550 मेगावाट और ओबरा-बी से 1000 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था। बाद में तकनीकी कारणों से ओबरा-ए परियोजना को बंद कर दिया गया था। वर्तमान में सिर्फ ओबरा-बी से बिजली उत्पादन हो रहा है।