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Sonebhadra News: कुपोषण से जूझ रहे नौनिहाल, फिर भी एनआरसी में बेड खाली

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कुपोषण के खात्मे के लिए सरकार भले ही गंभीर हो, मगर जिले में अफसर बेपरवाह हैं। हाल यह है कि जिला अस्पताल में बने पोषण पुनर्वास केंद्र के अधिकांश बेड खाली पड़े हैं। अति कुपोषित बच्चों की बड़ी तादाद होने के बाद भी उन्हें इस केंद्र में रखने में लापरवाही समझ से परे है। यह स्थिति तब है, जब डीएम खुद कई बार विभागीय अफसरों को इसके लिए निर्देश दे चुके हैं। जिम्मेदारों की लापरवाही से जिले में कुपोषण मिटाने के अभियान को झटका लग रहा है।नीति आयोग ने सोनभद्र को जिन मानकों के आधार पर अति पिछड़े के रूप में चिह्नित किया है, उसमें पोषण भी मुख्य है। गरीबी और जागरूकता के अभाव में सही खान-पान न होने से बच्चे कुपोषण के शिकार हो रहे हैं। बाल विकास विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में करीब साढ़े तीन हजार बच्चे अति कुपोषित श्रेणी में है। इसमें भी गंभीर तीव्र कुपोषण श्रेणी में शामिल बच्चों की संख्या भी साढ़े पांच सौ से अधिक है।
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शासन का निर्देश है कि अति कुपोषित और गंभीर तीव्र कुपोषण श्रेणी में शामिल बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में 14 दिनों तक रखकर उनके बेहतर खान-पान की व्यवस्था करते हुए स्वास्थ्य की निगरानी की जाय। ज्यादा से ज्यादा बच्चों को इसका लाभ मिले, इस मकसद से डीएम के निर्देश पर जिला अस्पताल में स्थित एनआरसी की क्षमता दोगुनी की गई है, बावजूद कुपोषण से जूझते बच्चों को यहां जगह नहीं मिल पा रही।
नियमों के मुताबिक केंद्र में लगे सभी बेड पर नियमित बच्चे होने चाहिए। प्रत्येक बच्चे को 14 दिन रखकर निगरानी करने और खान-पान की भरपूर खुराक देने का भी प्रावधान है। इससे इतर जिले में हालात बदतर हैं। जिले सभी एनआरसी के अधिकांश बेड अधिकतर खाली होते हैं। हालांकि विभागीय आकड़ों में सब कुछ ठीक रहता है।
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- दुद्धी और म्योरपुर में भी है एनआरसी जिला अस्पताल में 20 बेड के एनआरसी के अलावा दुद्धी सीएचसी के एनआरसी की क्षमता चार बेड से बढ़ाकर दस बेड किया गया है। म्योरपुर में दस बेड की क्षमता का एनआरसी स्थापित किया गया। एनआरसी खोलने की मंशा पर जिम्मेदारों की उदासीनता भारी पड़ रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिला मुख्यालय से महज एक किमी दूर जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र के अधिकांश बेड लंबे समय से खाली हैं, मगर अफसर इससे बेखबर हैं।
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जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रबंधक निगरानी में फेल एनआरसी में तीन तरीके से अति कुपोषित बच्चों को भर्ती किया जाता है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की आरबीएसके टीम, अस्पताल मेंं उपचार के लिए आने वाले बच्चों और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की ओर से दाखिला कराया जाता है, मगर तीनों विभाग अपनी जिम्मेदारी में लापरवाह बने हैं। जिले में पोषण पुनर्वास कार्यक्रम के निगरानी की जिम्मेदारी जिला स्वास्थ्य कार्यक्रम प्रबंधक की भी होती है, मगर उनकी ओर से भी लापरवाही जारी है।
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वर्जन... एनआरसी में सिर्फ गंभीर तीव्र कुपोषण वाले बच्चों को रखना होता है, जिनकी संख्या जिले में करीब साढ़े पांच सौ है। पिछले कुछ दिनों से पोषण पुनर्वास केंद्र में बच्चे न होने की जानकारी है। जल्द ही संबंधित श्रेणी बच्चों को दाखिल कराया जाएगा। -राजीव सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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