भारत सरकार ने बिना हॉलमार्क के सोना बिक्री पर रोक लगा दी है। नया नियम एक अप्रैल से लागू भी हो गया है। नए नियम को उपभोक्ताओं के हित में बताया जा रहा है, मगर इससे छोटे सराफा व्यवसायियों के साथ कारीगर अपने व्यवसाय को लेकर चिंतित हैं।उपभोक्ता जो सोना खरीद रहे हैं, वह शुद्ध है या नहीं है, इसकी जांच भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) करती है। यह संस्था सोना, चांदी और दूसरी कीमती धातुओं से बनी ज्वेलरी या कलाकृतियों की जांच करती है। अगर धातु शुद्ध है तो इसे एक टैग दिया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया को ही हॉलमार्क कहा जाता है। सरकार ने निर्देश जारी किया है कि बिना हॉलमार्क लगाए सराफा व्यवसायी सोने की बनी कोई चीज नहीं बेच पाएंगे। सराफा व्यवसायियों की मानें तो नए नियम से बड़े सराफा व्यवसायियों पर बहुत फर्क तो नहीं पड़ेगा, मगर छोटे व्यवसायी और कारीगरों के कारोबार पर इसका सीधे असर पड़ सकता है। कारण कि उनका पूरा व्यवसाय बड़े व्यवसायियों के अधीन होगा। लोकल स्तर के कारीगरों के बनाए आभूषण पर बीआईएस मार्का नहीं होने के कारण उसकी मार्केट वैल्यू नहीं होगी। इससे कारीगरों के रोजी-रोटी पर संकट आ सकता हैं।
सराफा व्यवसायियों की प्रतिक्रिया: हॉलमार्किंग का नियम 2021 से है, तब तीन डिजिट का कोड होता था। अब सरकार ने छह डिजिट का हॉलमार्क अनिवार्य कर दिया गया है। इससे प्रोडक्ट के बारे में डिटेल पता किया जा सकेगा। -मिठाईलाल सोनी, अध्यक्ष- श्री सोनभद्र सराफा एसोसिएशन।
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शासन के जो भी निर्देश हैं, उसका अक्षरश: पालन करते हुए कारोबार किया जाएगा। नया नियम कारोबारियों के साथ उपभोक्ताओं के हित में है। -अमित सेठ, सराफा कारोबारी।
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नया नियम कारोबारियों के हित में हैं। इससे न सिर्फ सराफा व्यवसायियों को कारोबार करने में सहूलियत होगी, बल्कि उपभोक्ताओं को आभूषण खरीदने पर आत्म संतुष्टि मिलेगी। कहीं कोई संदेह ही नहीं रहेगा। - जयकुमार केशरी, सराफा कारोबारी।
- हॉलमार्किंग के नियम पहले से हैं। नए नियम से कारोबार में और ज्यादा पारदर्शिता आएगी। इससे सराफा कारोबारियों को कोई दिक्कत नहीं हैं। -राजेश सोनी, महामंत्री- श्री सोनभद्र सराफा एसोसिएशन।