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अब कहकर नहीं कर के सीखेंगे गणित और विज्ञान

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शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय और एडेड प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों और कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में गणित और विज्ञान की शिक्षा का पैटर्न बदलने जा रहा है। अब विज्ञान और गणित की पढ़ाई केवल थ्योरी यानी किताबों पर आधारित नहीं रहेगी बल्कि विद्यार्थी प्रैक्टिकल के जरिए विषयों को समझेंगे। इसके लिए नई शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक विद्यालय के लिए गणित और विज्ञान की किट भेजी जा रही हैं। स्कूलों को मिलने वाले किट में प्रैक्टिकल की सामग्रियां उपलब्ध होंगी।
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राबर्ट्सगंज, ओबरा, दुद्धी और घोरावल तहसील क्षेत्र में 2061 परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं, जबकि चार प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय एडेड हैं। इसके अलावा नौ कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय हैं। नई शिक्षा नीति के तहत अब इन विद्यालयों के लिए विज्ञान और गणित की किट भी भेजने की तैयारी है। विद्यार्थी गणित और विज्ञान विषयों को केवल किताबों के जरिए न जानें, बल्कि प्रैक्टिकल करके उनके सूत्रों को समझेंगे। जनपद में गणित और विज्ञान की किट जल्द पहुंचेंगी। किट में विज्ञान और गणित के प्रैक्टिकल संबंधी उपकरण होंगे। शिक्षा विभाग की मानें तो विज्ञान किट की कीमत आठ हजार और गणित किट की कीमत 19 हजार रुपये है। शासन से किट मिलते ही स्कूलों को भेजवा दिया जाएगा। शिक्षकों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
जिले में गणित और विज्ञान की पढ़ाई के लिए किट जल्द आने की संभावना है। सरकार के इस पहल से विद्यार्थियों का मानसिक विकास होगा। किट मिलते ही स्कूलों को उपलब्ध करा दी जाएगी। - हरिवंश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।
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