सोनभद्र। गैंगस्टर और एनडीपीएस एक्ट के मामले में दो आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी है। शक्तिनगर थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी) विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट हरिकेश कुमार की अदालत ने सुनवाई की। वहीं करमा थाने में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मामले में विशेष न्यायाधीश एससी/एसटी एक्ट गोविंद मोहन की अदालत ने मामले में निर्णय सुनाया। शक्तिनगर थाने में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामले में चंदौली के चकरघट्टा थाना क्षेत्र के बैरगढ़ निवासी जितेंद्र कुमार को आरोपी बनाया गया था। अभियोजन का आरोप था कि गुलशन उर्फ भोला यादव इस गैंग का लीडर है। वहीं जितेंद्र यादव, अमित यादव उर्फ प्रिंस तथा आशीष कुमार सिंह उसके सक्रिय सदस्य हैं। इस गिरोह का नाम 7 अगस्त 2022 को ट्रक से कोयला गायब होने की जांच के दौरान सामने आया था। संबंधित प्रकरण में धोखाधड़ी सहित अन्य आरोपों में चार्जशीट 17 फरवरी 2023 को न्यायालय में दाखिल कर दी गई थी। बाद में आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की गई। अदालत ने 14 दिसंबर 2023 को चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए सम्मन और वारंट जारी किए।प्रकरण में जितेंद्र की दाखिल अग्रिम जमानत पर सुनवाई करते समय अदालत ने पाया कि आरोपी के खिलाफ 24 जुलाई 2025 से गैर जमानती वारंट प्रभावी है। उसकी गैरहाजिरी के कारण अभी तक आरोप तय नहीं हो पाए हैं। अदालत ने कहा कि गैंगस्टर एक्ट के मामले में अग्रिम जमानत असाधारण राहत है और वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी को इसका लाभ देने का पर्याप्त आधार नहीं है। इससे जुड़े विधि व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी गई। वहीं दूसरे मामले में करमा थाना क्षेत्र के बंदरदेवा तिलौली कला निवासी रामवृक्ष की अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई करते समय अदालत ने पाया कि गत जुलाई माह में पकड़े गए कमलेश ने पुलिस को बताया था कि वह इसे रामवृक्ष सोनकर से खरीदा था। आरोपी का तर्क था कि उसे सह आरोपी के बयान के आधार पर फंसाया गया है बरामद गांजे से उसका कोई संबंध नहीं है। सह आरोपी को जमानत भी मिल चुकी है। विशेष लोक अभियोजक ने विरोध करते हुए कहा कि आरोपी की भूमिका विवेचना में सामने आई है। उसके खिलाफ पूर्व में इसी तरह के दो मामले दर्ज भी हो चुके हैं। न्यायालय ने आपराधिक इतिहास को देखते हुए अर्जी खारिज कर दी।