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Sonebhadra News: 41 हजार कीमत के बकरे का नहीं मिला कोई खरीदार

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विंढमगंज। कुर्बानी का त्योहार ईद -उल-अजहा (बकरीद) 17 जून को मनाया जाएगा। पर्व के मद्देनजर क्षेत्र में बकरों की खरीद-फरोख्त जोरों पर है। सोमवार को लगने वाले साप्ताहिक बाजार में बकरा खरीदने वालों की भीड़ लगी रही। झारखंड, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्र से भी लोग कुर्बानी के लिए बकरा खरीदने पहुंचे।
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बुटबेढ़वा ग्राम पंचायत में लगने वाला साप्ताहिक बकरा बाजार के ठेकेदार परवेज अहमद कुरैशी ने बताया कि सामान्यतया साप्ताहिक बकरा बाजार में मीट व्यवसायियों के लिए लगभग 3000 बकरों की आमद पड़ोसी प्रांत झारखंड, छत्तीसगढ़, बिहार व मध्यप्रदेश से होती है। बकरीद के पूर्व पड़ने वाले इस अंतिम बकरा बाजार में कुल 4012 बकरों की आमद रही। इसमें लगभग 200 बकरे कुर्बानी के लायक रहे। कुर्बानी के बकरों की उम्र 1 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। विगत 45 वर्षों से लगने वाले जनपद के सबसे बड़े बकरे बाजार में पड़ोसी राज्य में झारखंड के रांची, बगोदर, कतरास, गढ़वा, नगर, डाल्टेनगंज आदि जगहों से खरीदार आते हैं।
इस वर्ष कुर्बानी बकरे की कीमत 800 जबकि बरबरी नस्ल 1000 प्रति किलो के हिसाब से चढ़ी, जो पिछले वर्ष की तुलना में 300 से ज्यादा रही। बकरों की कीमत नजराना के रूप में बकरा मालिक को अदा की जाती है। बाजार में कुर्बानी के लायक सबसे बुलंद बकरे की कीमत 41 हजार थी, मगर उसका कोई खरीदार नहीं मिला। बाद में बकरे का सर्वाधिक नजराना 25500 मोहम्मद अशरफ और 23 हजार इमरान खान ने बकरा मालिक को अदा किया। विंढमगंज बकरा बाजार के संरक्षक इकबाल अहमद कुरैशी उर्फ कुक्कू बाबू ने बताया कि इबादत के त्योहार बकरीद को लेकर लोगों में उत्साह है। हर कोई अपनी क्षमता के अनुसार कुर्बानी देने की तैयारी में जुटा है।
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