रेणुकूट/ओबरा। जिले में पिछले दो दिनों से बरसात भले ही बंद हो गई हो, लेकिन बांधों का जलस्तर अभी भी कम नहीं हुआ है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश का पानी कैचमेंट एरिया में आने से रिहंद बांध का जलस्तर उच्चतम स्तर पर बना हुआ है। बृहस्पतिवार को बांध के नौ गेट को 15-15 फीट तक खोलकर 72 हजार क्यूसेक पानी ओबरा बांध में छोड़ा गया। ओबरा बांध के भी आठ गेट खुले रहे। दोनों बांधों की सभी पनबिजली इकाइयां भी चालू हैं। यह पानी सोन नदी में जा रहा है, जिससे तटवर्ती इलाकों में अलर्ट है।
रिहंद बांध का जलस्तर सुबह 10 बजे तक 871.3 फीट पर पहुंचा था। एक दिन पहले बुधवार को रिहंद बांध के सात फाटक 10-10 फीट तक खोले गए थे। इसके बावजूद बांध का जलस्तर ज्यादा नीचे नहीं गया। इसे देखते हुए रात में ही सभी फाटकों को 5-5 फीट और खोल दिया गया। बृहस्पतिवार की सुबह 10 बजे दो और फाटक खोल दिए गए। बांध पर बनी छह टरबाइन को पूरी क्षमता से चलाया जा रहा है। इससे लगभग 17500 क्यूसेक पानी निकल रहा है और 300 मेगावाट बिजली का भी उत्पादन हो रहा है। इसके अलावा नौ गेट 15-15 फीट खुलने करीब 72 हजार क्यूसेक पानी की निकासी की जा रही है। दूसरी ओर रिहंद बांध से पानी छोड़े जाने से ओबरा बांध में भी जलस्तर नीचे नहीं आ रहा। एहतियात के तौर पर बृहस्पतिवार को ओबरा बांध के आठ गेट फिर से खोल दिए गए। यहां एक लाख तीस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग की टीम बांध की निगरानी में जुटी हुई है। बांध के अधिशासी अभियंता आरके खरे ने बताया कि बृहस्पतिवार की दोपहर तक ओबरा बांध के जल स्तर को सामान्य स्तर पर लाने के लिए आठ गेट खोले गए हैं। ओबरा बांध के 4, 5, 7, 8 और 9 नंबर गेट को दस-दस फीट, जबकि 6, 10 और 11 नंबर गेट को पांच-पांच फीट खोला गया है। इससे करीब एक लाख तीस हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बांध पर निर्मित जल विद्युत की 33 मेगावाट क्षमता की तीनों इकाइयों को फूल लोड पर चलाकर 87 मेगावाट बिजली उत्पादन किया जा रहा है। शाम तक ओबरा बांध का जलस्तर 192.82 मीटर पर स्थिर है।