दुद्धी के टीसीडी मैदान पर बन रहा प्रतीकात्मक रावण-संवाद
सोनभद्र। दुर्गोत्सव का उत्साह चरम पर है तो दशहरा की तैयारी भी शुरू हो गई है। असत्य पर सत्य की जीत के प्रतीक के रूप में लंकेश रावण का पुतला जलाया जाना है। जिले में अलग-अलग स्थानों पर रावण दहन के लिए पुतला बनाया जा रहा है, मगर इसमें भी दुद्धी में तैयार हो रहा पुतले से जुड़ी कहानी रोचक है। यह पुतला एक मुस्लिम परिवार तैयार कर रहा है। जौनपुर से आए इस परिवार को 51 फीट ऊंचे पुतला बनाने की जिम्मेदारी दी गई है, जिसे वह पूरे मनोयोग से निभाने में लगे हैं। कारीगर एखलाक के मुताबिक 35 वर्ष पहले वह इस कार्य से जुड़े थे और आज भी परंपरा का उसी शिद्दत से निर्वहन कर रहे हैं। जौनपुर जिले के केराकत निवासी एखलाक अपनी पत्नी रानी और बेटे हसरत के साथ मिलकर हर साल रावण का पुतला तैयार करते हैं। रामलीला कमेटी का भरोसा और परिवार की पुश्तैनी कला दोनों ने इस काम को दुद्धी की रामलीला का अभिन्न हिस्सा बना दिया है। दुद्धी रामलीला कमेटी इस वर्ष 51 फीट ऊंचा रावण का पुतला बनवा रही है। इसके निर्माण का जिम्मा एखलाक को 65 हजार रुपये में सौंपा गया है। कमेटी अध्यक्ष कन्हैयालाल अग्रहरि और महामंत्री सुरेंद्र गुप्ता के मुताबिक कई वर्षों से पुतला निर्माण का काम इसी परिवार से कराया जा रहा है। उनके बीच बना सहयोग और विश्वास गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल है। एखलाक बताते हैं कि पुतला बनाना उनके परिवार का पुश्तैनी व्यवसाय है और इसी से घर की आजीविका चलती है। दुद्धी के अलावा वह प्रयागराज की इको कंपनी के लिए भी रावण का पुतला बनाते हैं। वहां इस काम के लिए उन्हें 70 हजार रुपये मिल रहे हैं। रावण दहन के आयोजन में उनके परिवार की कला भले ही कुछ देर बाद अग्नि के हवाले हो जाए, लेकिन उससे जुड़ी मेहनत और परंपरा हर साल लोगों के सामने आती है।