श्री विशाखा रमणबिहारी रासलीला मण्डल की ओर से मनमोहक रास की प्रस्तुती की जा रही है। रासलीला के माध्यम से भक्त सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए सुदामा भगवन श्री कृष्ण के परम मित्र तथा भक्त थे। वे समस्त वेद-पुराणों के ज्ञाता और विद्वान ब्राह्मण थे। श्री कृष्ण से उनकी मित्रता ऋषि संदीपनी के गुरुकुल में हुई। सुदामा अपना जीवन यापन ब्राह्मण रीति के अनुसार भिक्षा मांग कर करते थे। वे एक निर्धन ब्राह्मण थे तथा भिक्षा से कभी उनके परिवार पत्नी तथा बच्चे का पेट भरता तो कभी भूखे ही सोना पड़ता था। फिर भी सुदामा इतने में ही संतुष्ट रहते और हरि भजन करते रहते। बाद में वे अपनी पत्नी के कहने पर सहायता के लिए द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण के पास गए। परंतु संकोचवश उन्होंने अपने मुख से श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा। परन्तु श्री कृष्ण तो अन्तर्यामी हैं, उन्होंने भी सुदामा को खाली हाथ ही विदा कर दिया। जब सुदामा जी अपने नगर पहुंचे तो उन्होंने पाया की उनकी टूटी-फूटी झोपडी के स्थान पर सुंदर महल बना हुआ है तथा उनकी पत्नी और बच्चे सुन्दर, सजे-धजे वस्त्रो में सुशोभित हो रहे हैं। इस प्रकार श्रीकृष्ण ने सुदामा जी की निर्धनता का हरण किया। इस अवसर पर प्रदीप अग्रवाल, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जैन, दिनेश जैन, राजेश साहनी, महेंद्र केसरी, विमल शाह आदि उपस्थित रहे।