सोनभद्र। अनुसूचित जाति की किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश पाॅक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। दोनों पर दो-दो लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड में से 3.20 लाख रुपये पीड़िता को दी जाएगी। इस मामले में कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता से शादी करने के कारण सजा से राहत देने की दलील को खारिज कर दिया।
अभियोजन के मुताबिक कोन थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने चार जनवरी 2016 को कोन थाना में दी तहरीर बताया था कि उसकी बेटी (16) सिलाई मशीन का धागा खरीदने साइकिल से बाजार गई थी। रास्ते में दाे युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। किसी तरह उनके चंगुल से छूटकर आई किशोरी ने परिजनों को घटना की जानकारी दी।
तहरीर पर पुलिस ने दोनों आरोपियों पर केस दर्ज कर छानबीन शुरू की। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल किया। अदालत में सुनवाई के दौरान एक आरोपी की ओर से दलील दी गई कि उसने घटना के बाद पीड़िता से शादी कर ली है। उनके दो बच्चे भी हैं। लिहाजा उसे सजा में छूट दी जाय। उसके जेल जाने पर परिवार का भरण पोषण बाधित होगा।
अभियोजन ने इसका विरोध करते हुए तर्क रखा कि सामूहिक दुष्कर्म के अपराध की गंभीरता पीड़िता से शादी करने से कम नहीं होती। लिहाजा आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाय। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों व तर्कों को सुनने के बाद फैसला सुनाया। अजमेर आलम समेत दोनों दोषियों को अलग-अलग धाराओं के अंतर्गत उम्र कैद और दो-दो लाख रुपये अर्थदंड का आदेश दिया।