सोनभद्र। जनपद न्यायालय परिसर स्थित एडीआर भवन में बुधवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की मासिक मध्यस्थ बैठक हुई। इसमें मध्यस्थ अधिवक्ताओं को मध्यस्थता प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखने और वैवाहिक विवादों का मुकदमा दर्ज होने से पहले ही प्री-लिटिगेशन स्तर पर निस्तारण कराने पर विशेष जोर दिया गया। बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं सिविल जज (सीडी) राहुल ने कहा कि मध्यस्थता की कार्यवाही न्यायालय की कार्यवाही से अलग और पूरी तरह गोपनीय होती है। यदि मध्यस्थता सफल होती है तो पक्षकारों को न्यायालय में केवल समझौते की जानकारी देनी चाहिए, जबकि असफल होने की स्थिति में मध्यस्थ अपनी रिपोर्ट में केवल इतना उल्लेख करें कि मध्यस्थता सफल नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कार्यवाही के दौरान हुई चर्चा या प्रस्तावों का किसी भी स्तर पर खुलासा नहीं किया जाना चाहिए। सचिव ने मध्यस्थों से उपभोक्ता अधिकारों और उपभोक्ता आयोग (फोरम) के प्रति लोगों को जागरूक करने का भी आह्वान किया, ताकि उपभोक्ता अपनी शिकायतों के निस्तारण के लिए उपलब्ध कानूनी व्यवस्था का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें। उन्होंने वैवाहिक विवादों में प्री-लिटिगेशन स्तर पर समझौते को बढ़ावा देने पर बल देते हुए कहा कि न्यायालय में वाद दायर करने से पहले जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से विवादों का समाधान कराया जा सकता है।