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स्वाभिमान और करुणा के साकार रूप थे महाप्राण निराला

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सोनभद्र। मधुरिमा साहित्य गोष्ठी की तरफ से राबटर्सगंज में बृहस्पतिवार को महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की जयंती परंपरागत तरीके से निराले अंदाज में मनाई गई। इस दौरान विचार गोष्ठी में उनको याद करते हुए काव्य पाठ का आयोजन किया गया। अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार अजय शेखर कहा कि महाप्राण निराला युगपुरुष और युगनायक थे। विषमताओं के बीच जीवन व्यतीत करते हुए उन्होंने विष पिया और समाज को अमृत दान दिया। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं एवं जन सरोकारों का चित्रण साफ झलकता है। संत कीनाराम पीजी कालेज के प्राचार्य डा. गोपाल सिंह ने कहा कि महाकवि निराला स्वाभिमान और करुणा के साकार रूप थे। एक तरफ जहां वह महान विनम्र थे वही कठोर भी। स्वाभिमान उनकी सबसे बड़ी पूंजी थी। उनकी सरोज स्मृति बेटी के प्रति संवेदनशीलता को बखूबी दर्शाती है। साहित्यकार डॉ. अर्जुनदास केशरी, रामनाथ शिवेंद्र ने कहा कि वह आजीवन विषमताओं के खिलाफ संघर्ष करते रहे। राष्ट्रपति से सम्मानित शिक्षक ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि महाकवि निराला की जन्मभूमि क्रांतिकारियों की धरती रही है। उनका साहित्य क्रांति से ओतप्रोत रहा है इनकी रचनाओं में शासन सत्ता से संघर्ष का रूप देखने को मिलता है। अशोक तिवारी ने कहा कि निराला का जीवन निराला था। दीपक कुमार केशरवानी, सुशील राय, प्रद्युम्न कुमार त्रिपाठी, विकास वर्मा, सुनील शुक्ला, जयराम सोनी, जगदीश पंथी, खुर्शीद आलम, गोपालस्वरूप पाठक, राधेश्याम पाल, ईश्वर विरागी, सुशील राही, दिवाकर विजयगढ़ ,धर्मेंद्र चौहान, नजर मोहम्मद रजक आदि ने कहा कि महाप्राण निराला की रचनाओं लोगों के जेहन में उन्हें सदैव जीवंत रखेंगी।
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