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नमामि गंगे परियोजना के कार्य में खपा रहे लोकल बालू

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जिले में बालू खनन पर लगी रोक को सरकारी निर्माण कार्यों में लगी एजेंसियां ही ठेंगा दिखा रही हैं। झीलो खम्हरिया गांव में रिहंद जलाशय के किनारे नमामि गंगे परियोजना के तहत चल रहे कार्य में धड़ल्ले से स्थानीय बालू का इस्तेमाल किया जा रहा है। निर्माण एजेंसियां अफसरों की मिलीभगत से सरकारी राजस्व को दोहरा चूना लगा रही हैं। रायल्टी के रूप में तो नुकसान हो ही रहा है, कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित है। इसी कार्य की आड़ में तमाम खनन माफिया बालू निकासी कराकर अन्यत्र भी भेजने लगे हैं। इसमें वर्चस्व को लेकर तनातनी भी बढ़ने लगी है। दुद्धी और म्योरपुर ब्लाक के दर्जनों गांवों में शुद्ध पानी पहुंचाने के लिए झीलो खम्हरिया में पेयजल परियोजना का निर्माण नमामि गंगे योजना के तहत चल रहा है। टंकी निर्माण, पंप स्थापना से लेकर पाइपलाइन बिछाने का कार्य जोरों पर है। प्रधानमंत्री की प्राथमिकता वाली योजना के तहत चल रहे निर्माण कार्य में गुणवत्तापूर्ण बालू के बजाय स्थानीय नदियों से बालू निकालकर इस्तेमाल किया जा रहा है। जिले में बालू खनन में पिछले तीन वर्षों से रोक है। इस लिहाज से खनन से पूर्व खनिज विभाग को परमिट व रायल्टी का भुगतान भी करना होगा। इससे इतर परियोजना में काम करने वाली कंपनी न सिर्फ अवैध तरीके से खनन कर रही है, बल्कि रायल्टी व परमिट के नाम पर भी क्षति पहुंचा रही है। अवैध निकासी को लेकर जिम्मेदारों की अनदेखी का असर यह है कि अन्य लोग भी यहां अवैध तरीके से बालू निकालने लगे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के कारण उफनाई नदियों से बालू निकालकर टिपर व ट्रैक्टर से यहां गिराया जा रहा है। जगह-जगह ब्लास्टिंग से निकलने वाले पत्थर भी यहां गिराए जा रहे हैं। निर्माण कार्य में मानक की अनदेखी से कार्य की गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
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