काशी और प्रयागराज की तरह सोनभद्र से भी अनेक महत्वपूर्ण पौराणिक संदर्भ जुड़े होने का दावा किया गया है। युवा इतिहासकार डॉ. जितेंद्र सिंह संजय ने कहा कि सोनभद्र को गुप्तकाशी और द्वितीय काशी की संज्ञा यूं ही नहीं मिली है। ऋग्वेद, यजुर्वेद, स्कंद पुराण, हरिवंश पुराण और अग्नि पुराण सहित कई ग्रंथों में सोनभद्र का उल्लेख मिलता है। उनके अनुसार जिले में 100 से अधिक ऐसे स्थल हैं, जिनका संबंध सतयुग से लेकर कलयुग तक के विभिन्न कालखंडों से है। डॉ. जितेंद्र ने बताया कि राजा नल–दमयंती, भगवान श्रीराम के वनगमन, पांडवों के वनवास और काकभुसुंडि से जुड़े प्रसंग सोनभद्र के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं। कोन क्षेत्र के रामगढ़ का संबंध श्रीराम के वनगमन से, जबकि पांडु नदी और पांडवेश्वर महादेव का जुड़ाव पांडवों से माना जाता है। इसी क्षेत्र में भगवान शिव द्वारा अर्जुन की परीक्षा लिए जाने की कथा भी प्रचलित है। जैन तीर्थंकर महावीर, गोस्वामी तुलसीदास, बौद्ध काल और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम से भी सोनभद्र का संबंध बताया गया। उन्होंने कहा कि सोनभद्र का इतिहास पौराणिक, धार्मिक, राजनीतिक और भौगोलिक विरासत को समझने का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। सोनभद्र के इतिहास पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण शुक्रवार को रॉबर्ट्सगंज स्थित पकरी के एक बैंक्वेट हॉल में दोपहर 12 बजे किया जाएगा। कार्यक्रम में कई गण्यमान्य अतिथि उपस्थित रहेंगे।