अब तक ज्ञानचंद की बकरी, दुदील, मोहन और मुराहु के गाय व बैल को भी तेंदुए ने हमला कर मार दिया है। रविवार की रात रवींद्र और बासदेव की बकरियों को भी तेंदुए ने शिकार बनाया। सभी जानवरों के शरीर पर तेंदुए के पंजे के निशान भी मिले हैं। लगातार बढ़ती घटनाओं से ग्रामीण भयभीत हैं। उन्हें चिंता है कि तेंदुआ कहीं घर के पास खेलते बच्चों अकेले आते-जाते लोगों पर हमला न कर दे। फिलहाल वन विभाग की टीम तेंदुए की निगरानी में जुटी है। रेंजर शहजादा इस्माइलुद्दीन ने बताया कि वन विभाग की टीम लगातार नजर बनाए हुए है। ग्रामीणों को भी सुरक्षा के लिए जागरूक किया जा रहा है।
पिपरी और म्योरपुर के बाद महुअरिया रेंज के जंगलों में भी तेंदुआ देखे जाने की खबर है। ब्लैक बक घाटी के रूप में मशहूर महुअरिया रेंज से सटे गांवों में पिछले चार-पांच दिनों में कई जगह तेंदुए के पैरों के निशान मिले है। ग्रामीणों ने भी तेंदुआ देखने का दावा किया है। इस क्षेत्र में भी वन विभाग की टीम सतर्क हो गई है। बताया जा रहा है कि भीषण गर्मी के कारण जंगलों में स्थित प्राकृतिक जलस्रोत सूखने के बाद वन्य जीव पानी की तलाश में आबादी क्षेत्रों का रुख कर रहे हैं।
अब तक जिन इलाकों में तेंदुए को देखा गया है, वहां पर्याप्त पानी मौजूद है। इससे पहले गर्मी की शुरुआत में ही फ़रवरी-मार्च में दो तेंदुए की मौत हो गई थी। म्योरपुर के जंगल में शिकारियों ने जंगली सूअर के शक में तेंदुए को मार गिराया था तो सलखन के पास मारकुंडी घाटी में सड़क पार करते समय एक तेंदुआ ट्रक की चपेट में आ गया था।