ओबरा तहसील स्थित उप निबंधक कार्यालय में ज्ञापन देते अधिवक्ता। स्रोत स्वयं
ओबरा/दुद्धी। मंगलवार को ओबरा और दुद्धी तहसील में अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित नई दर सूची (2026) का कड़ा विरोध किया। उन्होंने उप निबंधक को विभागीय मंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। अधिवक्ताओं ने नई दर सूची को अत्यधिक जटिल बताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की है। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने वर्तमान व्यवस्था में आवश्यक संशोधन के साथ नई दर सूची लागू करने की मांग की। ओबरा तहसील में संघर्ष समिति के संयोजक उमेश चंद्र शुक्ला ने कहा कि प्रस्तावित दर सूची छह चरणों में तैयार की गई है। इसे समझना आम नागरिकों, अधिवक्ताओं और विभागीय अधिकारियों के लिए भी कठिन है। उन्होंने कहा कि शासन का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना होना चाहिए। प्रस्तावित व्यवस्था इसके विपरीत है और इससे आम लोगों को अनावश्यक परेशानी और भ्रम का सामना करना पड़ेगा। शुक्ला ने मांग की कि यदि दर सूची में वृद्धि आवश्यक है, तो वर्तमान में लागू दर सूची में ही संशोधन कर नई दरें लागू की जाएं। इससे व्यवस्था सरल और व्यावहारिक बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि यदि आम नागरिक अपनी ही भूमि के क्रय-विक्रय की प्रक्रिया को नहीं समझ पाएंगे तो शासन के प्रति असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। अधिवक्ताओं ने प्रस्तावित व्यवस्था में ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि भूमि के क्रय के लिए 300 वर्गमीटर की सीमा पर आपत्ति जताई। उन्होंने विकासशील क्षेत्रों में 500 वर्गमीटर की सीमा निर्धारित किए जाने के प्रस्ताव को भी अव्यावहारिक बताया। अधिवक्ताओं का कहना था कि सोनभद्र जैसे अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति बहुल जिले की परिस्थितियों में यह व्यवस्था उचित नहीं है। इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक एवं प्रशासनिक बोझ पड़ेगा। दुद्धी तहसील में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण पांडेय के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया। उन्होंने उप निबंधक को ज्ञापन सौंपते हुए प्रस्तावित दर सूची-2026 को तत्काल स्थगित करने की मांग की। पांडेय ने कहा कि वर्ष 2024 की वर्तमान दर सूची में आवश्यक संशोधन कर नई दर सूची लागू की जाए। इससे आम जनता को अनावश्यक जटिलताओं का सामना नहीं करना पड़ेगा।