बिजली उत्पादन के निजी क्षेत्र की लैंको इकाई में कोयला का संकट क्रिटिकल जोन में पहुंच गया है। परियोजना में एक दिन का भी कोयला स्टॉक में न होने से रोजाना एनसीएल से प्राप्त कोयले के आधार पर ही बिजली का उत्पादन हो रहा है। कोयला कम होने से इकाइयों को कम क्षमता पर चलाया जा रहा है।
कुल 1100 मेगावाट की क्षमता वाली लैंको परियोजना से अब 600 मेगावाट का ही उत्पादन किया जा रहा है। इकाई के यह हालात कोयला किल्लत की वजह से बने हैं। रोजाना बिजली उत्पादन के लिए 12 हजार एमटी कोयला भी परियोजना के स्टॉक में नहीं बचा है। अब एनसीएल से मिल रहे कोयले के आधार पर ही बिजली आपूर्ति की जा रही है। मई से कोयले की किल्लत से परियोजना जूझ रही है लेकिन अब तक राहत नहीं मिल सकी है। परियोजना के यूनिट हेड संदीप गोस्वामी ने बताया कि कोयले की कमी के कारण परियोजना बेहद क्रिटिकल जोन से गुजर रही है। ऐसे में कोयले का स्टॉक न होने के कारण जितना कोयला परियोजना में आ रहा है, उसे ही जला कर बिजली उत्पादन किया जा रहा है। आयातित कोयले के इस्तेमाल से ही परियोजना की उत्पादन क्षमता वापस पटरी पर आएगी। हालांकि इससे बिजली के दामों में भी वृद्धि हो सकती है।