सोनभद्र। कभी मजदूरी की कमाई से किसी तरह परिवार का गुजारा करने वाली भरहियां गांव की लालसा देवी अब आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं। स्वयं सहायता समूह से मिली आर्थिक मदद और सरकारी योजनाओं के सहयोग से उन्होंने न केवल अपना पक्का घर बनाया, बल्कि दोना-पत्तल बनाने का कारोबार भी शुरू कर लिया। अब वह अपने पति के साथ मिलकर कारोबार चला रही हैं और सालाना करीब तीन लाख रुपये की बचत कर रही हैं। लालसा देवी बताती हैं कि वर्ष 2019 में उन्होंने चमेली आजीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्यता ली। समूह से मिले ऋण से उन्होंने अपने खेत में टमाटर और बैंगन की खेती शुरू की। अच्छी पैदावार और मुनाफा मिलने पर समय से पहले ऋण चुका दिया। इसके बाद दोबारा आर्थिक सहायता लेकर खेती का विस्तार किया और इसी आमदनी से अपना पक्का घर भी बनवाया। घर बनने के बाद लालसा ने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर करीब दो लाख रुपये की लागत से दोना-पत्तल बनाने की मशीन लगाई। अब वह अपने पति ब्रजेश के साथ घर पर ही दोना-पत्तल तैयार करती हैं और आसपास के होटल, ढाबों व दुकानों तक स्वयं इसकी आपूर्ति करती हैं। लालसा का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में दोना-पत्तल की मांग लगातार बढ़ रही है लेकिन एक मशीन से पूरी मांग पूरी नहीं हो पा रही है। इसे देखते हुए वह जल्द ही दूसरी मशीन लगाने की तैयारी कर रही हैं। उनका कहना है कि सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें सालाना करीब तीन लाख रुपये की आय हो जाती है। कारोबार शुरू होने के बाद उनके पति को भी रोजगार के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ता।