राबर्ट्सगंज राम सरोवर तालाब पर ललही छठ पूजन करती महिलाएं।
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सोनभद्र/घोरावल। जनपद में रविवार को पुत्रों के लंबी आयु की कामना के साथ माताओं ने ललही छठ का व्रत की और विधि विधान से पूजन अर्चन की। इस दौरान हलषष्ठी एवं बलराम की कथा सुनाई गई। राबट्र्सगंज और घोरावल नगर के साथ ग्रामीण अंचलों में भी ललठी छठ पर पूजन अर्चन हुआ। इस दौरान भजन कीर्तन का आयोजन किया गया। माताएं सुबह स्नान करने के बाद राबर्ट्र्सगंज नगर में रामसरोवर तालाब के भींटे पर पहुंचकर कुश के पौधे के पास पूजन अर्चन की। इसी तरह सिविल लाइंस रोड स्थित एक मकान के सामने मोहल्ले की महिलाएं एकत्रित होकर पूजन की। माताओं ने व्रत रखकर अपनी संतानों की सुख समृद्धि के लिए भगवान बलराम की पूजा अर्चना की। पूजन के दौरान आरती, शिवकुमारी, स्नेहलता, नीति सिंह, पुष्पा, कोमल पांडेय आदि पूजन की। घोरावल नगर के दशमिहवा तालाब पर शिव मंदिर परिसर में बुजुर्ग महिलाओं के हलषष्ठी एवं बलराम की कथा सुनाई। ग्रामीण इलाकों में भी हलषष्ठी का पूर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया। माताओं ने व्रत रखकर अपनी संतानों की सुख समृद्धि के लिए भगवान बलराम की पूजा अर्चना की। ललही छठ को हल षष्ठी या हल छठ भी कहा जाता है। यह पर्व बलराम के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। इस व्रत की पूजा के लिए माताओं ने भैंस के गोबर से पूजा घर में दीवार पर हर छठ माता का चित्र बनाया और उनकी पूजा अर्चना की। इसके साथ ही भगवान गणेश और माता गौरी की पूजा की गई। इस व्रत को धारण करने वाली माताएं तालाब के किनारे पूजा की वेदी बनाकर विधि-विधान से पूजा-अर्चन की। हलषष्ठी की पूजा करते हुए बुजुर्ग महिलाओं ने पर्व की कथा और महत्व को बताते हुए कहा कि भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम का जन्म भादों मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी को हुआ था। बलराम को हल और मूसल से खास प्रेम था। यही उनके प्रमुख अस्त्र भी थे। इसलिए इसदिन किसान हल, मूसल और बैल की पूजा करते हैं। इसे किसानों के त्योहार के रूप में भी देखा जाता है।