बीजपुर। जरहा न्याय पंचायत की 14 ग्राम पंचायतों की करीब डेढ़ लाख आबादी की स्वास्थ्य व्यवस्था दो प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) के भरोसे है। यहां डॉक्टरों की कमी और सीमित स्वास्थ्य सेवाओं के कारण मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पीएचसी में सुबह 10 से शाम चार बजे तक ही सेवाएं संचालित होने के कारण मरीजों को करीब 45 किलोमीटर दूर म्योरपुर सीएचसी जाना पड़ता है। बीते बृहस्पतिवार को नेमना निवासी साबरक हुसैन की पत्नी फातमा खातून (38) को प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उन्हें पीएचसी बीजपुर ले गए। वहां से रेफर किए जाने के बाद एंबुलेंस के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। एंबुलेंस पहुंचने पर उन्हें म्योरपुर सीएचसी ले जाया जा रहा था। इसी दौरान किरबिल के पास एंबुलेंस में ही फातमा ने बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद उन्हें सीएचसी पहुंचाया गया। उपचार के बाद परिजन उन्हें घर ले गए। नवजात बच्ची का नाम नासरीन रखा गया है। यह फातमा की आठवीं संतान है। इससे पहले रविवार को नेमना निवासी रामकेश्वर की पत्नी गायत्री की प्रसव के दौरान समय पर उपचार न मिलने से बच्चे की मौत हो गई थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों से क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। पीएचसी बीजपुर के प्रभारी डाॅ. राणा रणधीर सिंह ने कहा कि सुविधाएं हैं। बिजली गुल रहने पर दिक्कत होती है।