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Sonebhadra News: बिजली चाेरी में खड़िया फीडर नंबर एक, ओबरा और बीना भी कम नहीं

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सोनभद्र। परियोजना क्षेत्राें के रहवासी इलाकों में बिजली की आपूर्ति विभाग के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। कटियामारी और कम लोड पर अधिक भार का उपभोग का असर है कि इन इलाकों में आपूर्ति देने वाले फीडर घाटे में हैं। जिले में सबसे अधिक लाइन लाॅस वाले पांच प्रमुख फीडरों में से चार बिजली और कोयला परियोजना क्षेत्रों वाले फीडर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में पढ़ी-लिखी और सभ्य आबादी की बसावट है, बावजूद लाइन लाॅस की स्थिति सर्वाधिक है। यह आंकड़ा 60 फीसदी से भी ज्यादा है।
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राबर्ट्सगंज और पिपरी डिविजन के अंतर्गत जिले में तीन लाख से अधिक उपभोक्ता हैं। इन उपभोक्ताओं तक समुचित बिजली आपूर्ति के लिए विभाग हरसंभव कोशिश कर रहा है। चोरी रोकने के लिए प्रवर्तन दल के साथ लगातार जांच जारी है। बावजूद पर्याप्त बिजली खपत के अनुसार विभाग को बिल नहीं मिल पा रहा।
घाटे के लिहाज से विभाग ने जिले में पांच ऐसे फीडरों को चिह्नित किया है, जहां लाइन लाॅस सबसे ज्यादा है। इनमें शक्तिनगर में आपूर्ति देने वाला खड़िया (शक्तिनगर बाजार) फीडर नंबर एक पर है। इसके अलावा दूसरे नंबर पर ओबरा सेक्टर-9, तीसरे पर बीना, चौथे पर दुद्धी नगर और पांचवें पर ओबरा टाउन फीडर शामिल हैं। यह वह फीडर हैं, जिनसे आपूर्ति वाले इलाकों में पढ़े-लिखे लोगों की आबादी अधिक है। बावजूद इन इलाकों में लाइन लॉस की स्थिति ने अफसरों को हैरान कर रखा है। लाइन लॉस में कमी लाने के लिए विभाग अब क्रमबद्ध एक-एक फीडरों पर अभियान चलाकर कार्रवाई करने की तैयारी में है।
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लाइन लॉस वाले पांच प्रमुख फीडर और उपभोक्ता:
फीडर: उपभोक्ता
खड़िया 6600
ओबरा सेक्टर-नौ 2000
बीना 3600
दुद्धी नगर 3900
ओबरा 2800
बिजली चोरों से कर्मचारियों की मिलीभगत भी है वजह
लाइन लाॅस के मामले कम न होने के पीछे बिजली चोरी करने वालों से मिलीभगत भी है। विभाग के ही कुछ कर्मचारियों की साठगांठ इनसे हैं। अधिकारी जब जांच अभियान चलाते हैं तो इससे पहले बिजली चोरी करने वालों को खबर मिल जाती है। वह तत्काल कटिया हटा लेते हैं और टीम के लौटने के बाद पुन: कटिया लग जाता है।
क्या है लाइन लाॅस
सब स्टेशन से सप्लाई की गई बिजली और उपभोक्ताओं द्वारा खपत की गई बिजली के अंतर को लाइन लॉस माना जाता है। मसलन उपकेंद्र से 10 यूनिट आपूर्ति की जा रही है तो उपभोक्ता सिर्फ चार से पांच यूनिट ही उपभोग कर पा रहे हैं। दो प्रकार के लॉस शामिल होते हैं। एक तकनीकी कारणों से और दूसरा उपभोक्ता द्वारा खपत की गई बिजली की सही बिलिंग नहीं होना।
सर्वाधिक लाइन लॉस वाले जिले के पांच फीडरों को चिह्नित किया गया है। इन फीडरों पर औसतन 60 फीसदी से अधिक लाइन लॉस की है। सभी फीडरों पर एक-एक कर अभियान चलाकर लाइन लॉस रोका जाएगा। पहले चरण में घर-घर जांच करते हुए वैध कनेक्शन लेने और क्षमता वृद्धि के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके बाद कार्रवाई भी जाएगी। - नीरज गोयल, अधीक्षण अभियंता, सोनभद्र।
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