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'जख्म : मुंशी की कलम' को सराहा

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शक्तिनगर। एनटीपीसी शक्तिनगर में रंगमंडल समूहन कला संस्थान की ओर से बृहस्पतिवार शाम कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की कहानी ''जख्म : मुंशी की कलम'' नाटक के मर्मस्पर्शी मंचन ने लोगों का मन मोह लिया। लोगों ने इसे सराहा। हिंदी पखवाड़ा के तहत आयोजित किया गया था।
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मुंशी प्रेमचंद की तीन कहानियों को आधार बनाकर समसामयिक दृष्टिकोण से मानवेंद्र त्रिपाठी का लिखा नाटक ''जख्म : मुंशी की कलम'' का मंचन राजकुमार शाह के निर्देशन में हुआ। नाटक की शुरुआत प्रेमचंद और ठाकुर का कुआं की मुख्य पात्र गंगिया के संवाद से हुई। प्रेमचंद की तीन कहानियां ठाकुर का कुआं, कफन, ईदगाह पात्रों के माध्यम से एक दूसरे से जुड़ती चली गईं। कहानियों के संवाद को वर्तमान स्थिति, परिस्थिति के दृष्टिकोण से देखने की जो कोशिश लेखक मानवेंद्र त्रिपाठी ने की है, वह काबिले तारीफ रही। अंतिम दृश्य में हामिद के साथ सभी पात्रों का प्रेमचंद के समक्ष आना और यह कहना कि आज हम सब इस जमाने के लिए पुराने पड़ गए हैं, कोई नहीं पूछता हमें। कम से कम आप तो हमें अकेला मत छोड़िए। यह सुनकर प्रेमचंद की वेदना द्रवित होकर उनकी लेखनी की शब्द की ही तरह फूट पड़ती है। तीनों कहानियों की आत्मा को निर्देशक राजकुमार शाह ने संवेदनशील बनाकर दृश्यों का प्रभावशाली निर्माण किया। नाट्य प्रस्तुति जख्म - मुंशी की कलम से अपने कथ्य, शिल्प और संगीत से संवेदनहीन समाज की सोई आत्मा को जगाने का प्रयास किया गया। मंच पर गंगिया की भूमिका को रिंपी वर्मा ने जीवंत किया। जोखू की भूमिका में राजन कुमार झा, घीसू और माधव सुनील कुमार और हेमेश कुमार, अमीना और हामिद के रूप में ख़ुशबू निशा और प्रियांक शर्मा ने अपने अभिनय से प्रभावित किया। इस अवसर पर एनटीपीसी के महाप्रबंधक अमरीक सिंह भोगल, जोसेफ़ बास्टियन, बीएचईएल के परियोजना निदेशक विनय कूहिकर आदि उपस्थित रहे। संचालन वरिष्ठ प्रबंधक राजभाषा एवं सीएसआर डाॅ. ओम प्रकाश ने किया।
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