सोनभद्र। यूपी बार काउंसिल सदस्य सचिव व हाईकोर्ट लखनऊ के अधिवक्ता जयनारायण पांडेय ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट एवं बार काउंसिल ऑफ इंडिया के आदेशानुसार सभी अधिवक्ताओं को सीओपी वेरिफिकेशन फार्म व री-इश्यू फार्म भरना अनिवार्य है। सिर्फ 1990 से पहले के पंजीकृत अधिवक्ताओं को शैक्षणिक प्रमाण पत्र नहीं देना है। इसके बाद के पंजीकृत सभी अधिवक्ताओं को शैक्षणिक प्रमाण पत्र देना अनिवार्य है।
जयनारायण पांडेय ने बार काउंसिल अध्यक्ष को पिछले दिनों पत्र देकर कहा था कि अधिवक्ताओं के सीओपी नवीनीकरण शुल्क जो 500 रुपये बार की पूर्व बैठक में निर्धारित किया गया है, वह बहुत अधिक है। उसे वर्चुअल बैठक बुलाकर कम किया जाए। यूपी बार काउंसिल अध्यक्ष शिव किशोर गोंड ने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल वर्चुअल बैठक बुलाई, जिसमें सर्वसम्मति से 250 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया। यूपी बार काउंसिल सदस्य सचिव ने बताया कि अधिवक्ताओं को अबकी बार सिर्फ चार वर्षों 2018, 2019, 2021 व 2022 की प्रैक्टिस का प्रमाण पत्र देना होगा। कोरोना के चलते वर्ष 2020 की प्रैक्टिस के प्रमाण पत्र की छूट प्रदान की गई है। सीओपी वेरिफिकेशन फार्म को अपने जिला, तहसील और यूपी बार काउंसिल सदस्य से प्रमाणित कराना अनिवार्य है। अगर कोई अधिवक्ता किसी बार का सदस्य नहीं है तो उसे शपथ पत्र के जरिए कारण दर्शाना अनिवार्य है।