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Sonebhadra News: अगले तीन दिन रुक-रुककर बारिश होने के आसार, किसानों को फसल बचाने की सलाह

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सोनभद्र। बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के चलते सोनभद्र के साथ ही पूर्वांचल के अन्य जिलों में अगले तीन-चार दिनों तक बारिश होने के आसार हैं। हवा की गति भी सामान्य से अधिक रह सकती है। बारिश के दौरान धान के साथ सब्जी की खेती किए किसानों से सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है। मंगलवार को तेज धूप, उमस के बाद दोपहर में बारिश हुई, बावजूद इसके तापमान में वृद्धि दर्ज की गई। सोमवार की तुलना में मंगलवार को अधिकतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। हालांकि न्यूनतम पारा 1.0 डिग्री गिरा है। मौसम विज्ञान केंद्र चुर्क के प्रेक्षक के अनुसार मंगलवार को चुर्क क्षेत्र का न्यूनतम पारा 25.0 और अधिकतम पारा 32.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ। इसके मुकाबले सोमवार को न्यूनतम पारा 26.0 और अधिकतम पारा 30.5 डिग्री सेल्सियस मापा गया था। आगामी दिनों में बारिश होने की वजह से तापमान में गिरावट दर्ज होने की उम्मीद है। ग्रामीण कृषि मौसम सेवा भू-भौतिकी विभाग बीएचयू के नोडल अधिकारी प्रो.रवि शंकर सिंह और तकनीकी अधिकारी (मौसम वैज्ञानिक) शिव मंगल सिंह ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव क्षेत्र के प्रभाव से नम हवाएं ओडिशा, झारखंड और बिहार होते हुए पूर्वांचल की ओर आ रही हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश के आसपास मानसून ट्रफ सक्रिय होने से रुक-रुककर बारिश के आसार हैं। बारिश और गरज-चमक के दौरान पशुओं को खुले स्थान, पेड़ के नीचे या बिजली के खंभों के पास न बांधें। उन्हें सूखे और हवादार शेड में रखें तथा फर्श पर पानी जमा न होने दें। स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के साथ चारा बारिश से सुरक्षित रखें। पशुओं को गीला, सड़ा या फफूंद लगा चारा न खिलाएं और बारिश के दौरान उन्हें अनावश्यक रूप से बाहर न ले जाएं। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार धान की फसल इस समय बाली बनने की अवस्था में है। खेत में पर्याप्त नमी होने पर सिंचाई नहीं करनी चाहिए। तेज हवा और बारिश के दौरान फसल गिरने से बचाने के लिए खेत में पानी जमा न होने दें। बारिश के बाद खेत का निरीक्षण कर कीट और रोगों की निगरानी करें। उर्वरक और पौध संरक्षण रसायनों का प्रयोग मौसम साफ होने तथा खेत से अतिरिक्त पानी निकलने के बाद ही करें। मिर्च की फसल में फूल आने की अवस्था होने के कारण लगातार बारिश और अधिक नमी से फूल झड़ने तथा फफूंद जनित रोगों का खतरा बढ़ सकता है। किसानों को जल निकासी की उचित व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। भिंडी और कद्दूवर्गीय फसलों में भी जलभराव से बचाव जरूरी है। बारिश के बाद फलों और पत्तियों पर रोग के लक्षण व कीटों की निगरानी करें। सड़े और क्षतिग्रस्त फलों को खेत से निकालकर नष्ट कर दें।
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