सोनभद्र। नगर निकाय चुनाव में दलीय उम्मीदवारों से निर्दलीय कम नहीं हैं। पूर्व के चुनावों में जिले की कई निकायों में निर्दलियों का पलड़ा भारी रहा है। उन्होंने न सिर्फ प्रमुख दल के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ा, बल्कि जीत का परचम भी लहराया। इस बार भी चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार दम भर रहे हैं। अब देखना है कि उनकी कोशिश कहां तक सफल होती है।
वर्ष 2017 के चुनाव में नगर पालिका सोनभद्र समेत जिले में आठ निकाय थे। जिला मुख्यालय की नगर पालिका में भाजपा प्रत्याशी को जीत मिली थी। निर्दल उम्मीदवार ने उन्हें कड़ी चुनौती दी थी। इसी तरह चुर्क-घुर्मा और ओबरा नगर पंचायत में भी जीत का स्वाद चखने वाले सत्ताधारी दल को निर्दल उम्मीदवारों से मुकाबले में मशक्कत करनी पड़ी। चोपन, रेणुकूट, पिपरी, दुद्धी और घोरावल नगर पंचायत में सत्ताधारी दल भाजपा और पूर्ववर्ती सरकार वाली सपा के प्रत्याशी मुकाबले में जरूर रहे, लेकिन जीत का स्वाद नहीं चख सके। इन पांचों निकायों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने बाजी मारी। पिपरी में तो निर्दल प्रत्याशी ने सबसे बड़ी जीत का रिकार्ड भी बनाया।
2012 और 2006 में हुए चुनावों में भी निर्दल उम्मीदवारों ने अपनी दमदारी दिखाई थी। दलीय उम्मीदवारों को पीछे छोड़ ज्यादातर निकायों में बढ़त हासिल की। इस बार के चुनाव में भी सभी निकायों में भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा जैसी प्रमुख दलों के अलावा निर्दल प्रत्याशी भी चुनावी मैदान में ताल ठोंक रहे हैं। कइयों ने नामांकन के साथ ही अपनी मजबूती दिखानी भी शुरू कर दी है। हालांकि करीब 15 दिन बाद होने वाले मतदान तक मतदाताओं पर अपना जादू चलाने में कितना कामयाब हो पाते हैं, इस पर सबकी निगाह लगी है।