डाला शहीद स्थल के पास की वह जगह जहां पकड़े गए हीरोइन तस्करी के आरोपी ने खोल रखी थी काफी किताब क
सोनभद्र। पुलिस ने ‘ऑपरेशन शुद्धि’ के तहत ढाई करोड़ की हेरोइन बरामदगी के बाद अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट के सरगना (सुल्तान) की तलाश तेज कर दी है, जो लखनऊ और बाराबंकी से तस्करी का नेटवर्क संचालित कर रहा था। जांच में खुलासा हुआ है कि तस्करों ने सियासत और ऊंचे प्रोफेशन का चोला ओढ़ रखा था, जिसके बाद अब पुलिस गिरोह के आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए संपत्ति कुर्क करने की तैयारी कर रही है। पुलिस ने ऑपरेशन शुद्धि के तहत दो महीने की कड़ी निगरानी के बाद एक बड़े हेरोइन सिंडिकेट का भंडाफोड़ करते हुए गत 17 अगस्त को 1204 ग्राम हेरोइन बरामद की थी, जिसकी कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये है। पुलिस ने इस रैकेट में शामिल दो सगे भाइयों समेत छह तस्करों को गिरफ्तार किया है। अब गिरोह के सरगना के साथ सिंडिकेट के आर्थिक नेटवर्क और अवैध कमाई से खड़े किए गए साम्राज्य के बारे में टोह ली जा रही है। लखनऊ से सोनभद्र तक फैले तस्करी के सिंडिकेट में जो सबसे बड़ा नाम सामने आया है, वह बाराबंकी का ‘सुल्तान’ है। इस शख्स को सिर्फ बाराबंकी नहीं, पूरे प्रदेश में फैले तस्करी के साम्राज्य के सुल्तान का दर्जा हासिल है। पिछले 10 साल में सोनभद्र में हेरोइन की जितनी भी बड़ी बरामदगी हुई है, सभी में सुल्तान का नाम सामने आया है लेकिन यह सुल्तान है कौन? उसकी वास्तविक हकीकत क्या है? वह कैसा दिखता है और उसका नेटवर्क कहां तक जुड़ा है? यह अब तक पहेली है। कहा जा रहा है कि अगर तस्करी के इस सुल्तान तक पुलिस के हाथ पहुंच गए तो इस कारोबार के भी अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हो सकता है। पकड़े गए तस्करी के आरोपियों के बारे में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आईं हैं। डाला चढ़ाई निवासी सुधीर उर्फ छोटू के पिता की चंद साल पूर्व शहीद स्थल के पास वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग किनारे मड़हे में चाय-नाश्ते की दुकान थी। वहां अब अच्छी-खासी दुकान बन गई है। सुधीर ने भी कापी-किताब की दुकान खोल रखी है। चंद सालों में लाखों की लागत से खड़ा किया घर भी लोगों के आकर्षण का केंद्र है। तस्करी में जहां उसके साथ उसके भाई धर्मवीर की भी संलिप्तता मिली है। वहीं एक भाई सभासद बताया जा रहा है। इसी तरह सूरज उर्फ अभिषेक के पिता हाल तक ठेला लगाते थे। बावजूद इसके अचानक उसकी लग्जरी लाइफ तो लोगों के सामने आई ही, दोमंजिला मकान भी उसकी खासी हैसियत बयां करने लगा है। बताते हैं कि पुलिस के लिए सबसे अधिक चुनौती जिले में गिरोह को लीड कर रहा सुधीर था। इसके पास सियासी समर्थन तो था ही खुद भी मुंशी के रूप में एक अच्छे प्रोफेशन से जुड़ा हुआ था। इस कारण स्थानीय स्तर पर पुलिस तस्करी की तफ्तीश के लिए उससे पूछताछ दूर उसके घर जाने से घबराती थी। जिस दिन बरामदगी हुई उस दिन भी यह डर बना हुआ था कि जरा सी चूक पुलिस के लिए मुश्किल का कारण बन सकती है।