रॉबर्ट्सगंज के एक होटल में शनिवार की रात मित्र मंच फाउंडेशन की ओर से मशहूर शायर मिर्ज़ा ग़ालिब की 228वीं जयंती पर मुशायरा एवं कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। मित्र मंच फाउंडेशन के निदेशक एवं पूर्व नगर पालिका परिषद अध्यक्ष विजय जैन, संरक्षक उमेश जालान, मुशायरे के सदर अब्दुल हई सहित अन्य अतिथियों ने दीप जलाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इसमें नामचीन शायरों-कवियों ने अपनी गजल, गीत और नज्म पेश किए। मित्र मंच फाउंडेशन की कार्यकारिणी के सदस्य साहित्यकार अशोक तिवारी ने ग़ालिब की ज़िंदगी और उनकी शायरी पर विचार व्यक्त किए। डॉ. मंजरी पांडेय ने नज्म पेश किया। उसके बोले थे हर एक बात पे कहते हो तुम कि तू क्या है, तुम्हीं कहो कि अंदाज़-ए-ग़ुफ़्तगू क्या है। शायर अब्दुल हई ने सुनाया, बस एक सच के सिवा कुछ नहीं कहा मैंने, तमाम चेहरों का पानी उतर गया..., वहीं रुस्तम इलाहाबादी ने सुनाया कि मोती बहा के वक़्त का सैलाब ले गया, दरिया खंगालने में बहुत देर हो गई..., हसन सोनभद्री ने जुबां से हाल-ए-दिल ज़ाहिर न होने देंगे हम लेकिन ये आंखें दिल की रिश्तेदार हैं कुछ कह नहीं सकते..., पं. प्रेम बरेलवी ने मिट्टी तेरे जहान की हम हैं मेरे ख़ुदा, चुपचाप बन गए हमें जैसा बना दिया..., विकास वर्मा ''''बाबा'''' ने इश्क़ ''''''''बाबा'''''''' निभाना है मुश्किल, इश्क़ यूं कर तो सभी लेते हैं..., क़ाशिफ़ अदीब ने ताक़तवर से ताक़तवर भी डरते हैं, सबकी कुछ न कुछ कमज़ोरी होती है..., रेहान हाशमी ने जो मेरे गीतों का इक-इक पेज है, दर्द का मेरे वो दस्तावेज़ है... सुनाकर श्रोताओं की वाहवाही बटोरी। सम्मेलन में कमल नयन त्रिपाठी, यावर प्रेम पथिक, धनंजय सिंह राक़िम ने भी काव्यपाठ किया। अध्यक्ष विकास वर्मा बाबा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम में नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष विजय जैन, उमेश जालान, अर्पण बंका, विनोद कुमार चौबे, नंदलाल केसरी, इकराम खां, विजयकांत मिश्रा, अमित वर्मा, श्याम राय, प्रेम प्रकाश राय, धर्मराज जैन, संदीप चौरसिया आदि उपस्थित रहे। मुशायरे एवं कवि सम्मेलन की सदारत शायर अब्दुल हई और संचालन हसन सोनभद्री ने की।