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Sonebhadra News: सलखन फासिल्स को यूनेस्को के स्थायी सूची में शामिल होने की बढ़ी उम्मीदें

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सलखन स्थित फासिल्स। - संवाद
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सोनभद्र। सारनाथ को यूनेस्को की स्थायी सूची में जगह मिलने के बाद जिले के सलखन फासिल्स को लेकर उम्मीदें बढ़ गईं हैं। जीवन के उत्पत्ति का प्रमाण संजोए इस धरोहर को जून 2025 में यूनेस्को की अस्थायी सूची में शामिल किया गया था। उसके बाद इस स्थल के लिए डोजियर तैयार करने के साथ ही, स्थायी सूची में जगह दिलाने के प्रयास किए जा रहे थे। 1.4 अरब वर्ष प्राचीन इस धरोहर की उम्र अमेरिका के येलोस्टोन पार्क से डेढ़ गुना अधिक तो है ही, वहां के मुकाबले सलखन फासिल्स ज्यादा सुरक्षित और अधिक मात्रा में मौजूद हैं। भू-वैज्ञानिकों के लिए यह स्थल वर्षों से अध्ययन का केंद्र तो बना ही है, विश्व विरासत सूची में शामिल होने के बाद यह स्थल पर्यटन के क्षेत्र में भी वैश्विक पहचान बनाता नजर आ सकता है। चार जून 2025 को जब इस धरोहर को यूनेस्को के अस्थायी सूची में जगह मिली तो बेहतरी की उम्मीदें जगने लगी। 25 हेक्टेयर में फैले फासिल्स पार्क में बड़ी मात्रा में वलयाकार आकृतियां तो मौजूद ही हैं, यहां फासिल्स का पूरा पहाड़ मौजूद है। झाड़-झंखाड़ से पटी इस जगह को सहेजने के साथ ही पर्यटन की दृष्टि से इस स्थल को संवारा जाए तो यह स्थल न केवल शोध का बड़ा केंद्र बना दिखाई देगा। पर्यटन के लिहाज से भी यह स्थल बड़ी पहचान बनाता दिखाई देगा। जैविक विकास के बारे में जानकारी देने वाला अमेरिका का येलोस्टोन पार्क जहां महज 500 मिलियन वर्ष पुराना है। वहीं सलखन फासिल्स की उम्र 1.4 अरब से भी अधिक आंकी जा चुकी है। कनाडा के मिस्टेकन पॉइंट की उम्र भी महज 565 से 541 मिलियन वर्ष पूर्व की है। यहां की सी. जॉगिंस जीवाश्म चट्टानें की भी उम्र 310 मिलियन वर्ष पूर्व है। दक्षिण अफ्रीका का बार्बरटन मखोनजवा पर्वत ही एक ऐसी धरोहर है, जिसकी चट्टानें 3.6 अरब वर्ष से भी अधिक पुरानी हैं।
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