बभनी क्षेत्र में मानर पर होली गीत गाते आदिवासी समाज के लोग।
बभनी। ब्लॉक के आठ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में सोमवार को होली मनाई जाएगी। रविवार को इन गांवों में होलिका दहन किया गया। आदिवासी किसी तरह की कोई अप्रिय घटना न हो, इसलिए होली के एक दिन पहले ही त्योहार मना लेते हैं। इसको लेकर पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। आदिवासी समाज में अब भी कुछ गांवों के लोग अपने पूर्वजों के बनाये गये परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। होली का त्योहार एक ऐसा त्योहार है जिसे यहां की आदिवासी समाज बड़े ही सौहार्द पूर्ण ढंग से दो दिन पहले ही मना लेते हैं। बभनी क्षेत्र के आठ गांवों कनवा, सेवढीटोला, सतबहनी, जौराही, सालेनाग, पतखिरना, झापर और फरीपान के आदिवासी दो दिन पहले ही होली का त्योहार मनाते हैं। सभी जगहों पर सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। जदवीर खरवार ने बताया कि पूर्वजों द्वारा ही यह परम्परा बनाया गया है जिसके धुरी पर हम लोग चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि होली के दिन गांव में कुछ बडी घटना हो गई थी जिसके वजह से गांव में हाहाकार मच गया था।इस पर गांव वालों ने ओझा सोखा से गणना कराया तो सोखाओं ने बताया कि होली के एक दिन या दो दिन पहले ही होली मनालें। इससे गांव में कोई घटना नहीं होगा।तभी से हम लोगों के पूर्वजों ने होली का त्योहार दो दिन पहले ही मनाते रहे। उसी परंपरा का हमलोग निर्वहन करते चले आ रहे हैं। जवाहर लाल जोगी ने बताया कि पूर्वजों द्वारा होलिका की पूजा गांव के बैगा द्वारा कराई जाती रही है जिस परंपरा को आज भी जिंदा रखा गया है। यही कारण है कि आदिवासी बनवासी समाज आज भी होली का त्योहार दो दिन पहले ही मना लेते हैं।