कोरोना की पहली और दूसरी लहर के दौरान जिले में काफी संख्या में लोगों ने अपनों को खो दिया। संसाधनों का अभाव भी लोगों के लिए परेशानी का सबब रहा। पड़ोसी देश चीन में कोरोना संक्रमण ने फिर से पांव पसारना शुरू किया। सरकार इसे लेकर बार-बार लोगों को सचेत कर रही है, बावजूद लोगों की लापरवाही नहीं थम रही। सरकारी दफ्तर हों या बाजार और सार्वजनिक स्थल। हर तरफ कोरोना से बचाव मानकों की अनदेखी हो रही है। सोशल डिस्टेंस तो दूर लोग मास्क लगाना भी जरूरी नहीं समझ रहे। कार्यालयों में कोरोना हेल्प डेस्क भी अब तक सक्रिय नहीं है। बिना रोकटोक लोग हर जगह आ-जा रहे हैं।
जिला अस्पताल : जहां खतरा ज्यादा, वहीं बेपरवाही
जिले के अलग-अलग इलाकों से रोजाना सैकड़ों मरीज और उनके तीमारदार जिला अस्पताल पहुंचते हैं। कुछ मरीज औद्योगिक इलाकों के होते हैं, जहां बाहर से आने वालों की संख्या अधिक रहती है। इन खतरों के बावजूद कोराना गाइड लाइन का पालन कराने के प्रति जिला अस्पताल प्रबंधन उदासीन हैं। बिना मास्क प्रवेश वर्जित का निर्देश तो जारी कर दिया गया है, लेकिन इस पर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। अस्पताल में प्रवेश करने पर कोरोना संक्रमण से बचाव की तैयारी नहीं है। नेत्र विभाग के पास स्थापित कोविड हेल्प डेस्क निष्क्रिय है। अस्पताल में बिना मास्क के मरीज आ रहे हैं। चिकित्सक से लेकर कर्मी तक बिना मास्क के घूम रहे हैं।
सीएमओ कार्यालय : न हेल्प डेस्क न सैनिटाइजर
नगर स्थित सीएमओ कार्यालय पर कोविड प्रबंधन के साथ ही जिले भर में इसके प्रसार को रोकने की जिम्मेदारी है। मगर यहां चिराग तले अंधेरा की कहावत चरितार्थ हो रही है। सीएमओ कार्यालय में रोजाना बड़ी तादाद में लोग पहुंचते हैं। यहां हेल्प डेस्क मौजूद नहीं है। प्रवेश द्वार के पास लगी सैनिटाइजर मशीन खराब है।
जिला पंचायत : सैनिटाइजर मशीन खराब
जिला पंचायत कार्यालय में भी कोराना संक्रमण के प्रति लोग गंभीर नहीं हैं। कार्यालय में प्रवेश करते ही बाई ओर कोविड हेल्प डेस्क स्थापित है, जो सक्रिय नहीं है। यहां लगे टेबल और कुर्सियों पर धूल जमी है। सैनिटाइजर मशीन लंबे समय से खराब है। नगर पालिका राबर्ट्सगंज के कार्यालय में भी कोविड हेल्प डेस्क मौजूद नहीं है।
विकास भवन व तहसील में भी हेल्प डेस्क का प्रबंध नहीं
विकास भवन से ग्राम पंचायतों का सीधा जुड़ाव होता है। यहां होने वाली गतिविधियों से ग्राम पंचायतों को संदेश जाता है। मगर जिम्मेदारों की उदासीनता का आलम यह है कि यहां हेल्प डेस्क ही नहीं है। सदर तहसील में भी हेल्प डेस्क मौजूद नहीं है। ऐसे में इन दोनो स्थानों पर आने वाले फरियादियों के साथ ही कर्मियों में संक्रमण की आशंका बनी होती है। इसी तरह सदर कोतवाली, विद्युत विभाग के कार्यालयों में भी हेल्प डेस्क नदारद है।
जिले में कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है। कोरोना गाइडलाइन के पालन पर जोर दिया जा रहा है। - डॉ. जीएस यादव, एसीएमओ।