अभियोजन पक्ष के मुताबिक मांची थाना क्षेत्र के चिचलिक गांव निवासी मैनेजर वादी ने 11 जुलाई 2006 को भाई की हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। उसने तहरीर में बताया था कि उसका भाई जयराम वादी चौरा से खोडैला के रास्ते पर मेठ का काम करता था। नौ जुलाई को घर से काम पर गया था।
चौरा गांव के गहबड़िया जंगल में शाम को उसकी गला काटकर हत्या कर दी गई। इस तहरीर पर केस दर्ज कर पुलिस ने विवेचना की। घटना में हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा निवासी कम्हारडीह थाना राबर्टसगंज और लालव्रत कोल का नाम प्रकाश में आया। इस मामले में अदालत ने दोनों नक्सलियों को उम्रकैद व 54-54 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं अर्थदंड न देने पर 3-3 वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी।
वहीं दूसरा मामला कोन थाना क्षेत्र का है। 26 फरवरी 2007 को कोन थाने में दी तहरीर में लीलावती पत्नी उदय प्रताप कनौजिया ने अवगत कराया था कि प्रधानी चुनाव की रंजिश को लेकर 25 फरवरी की रात हार्डकोर नक्सली मुन्ना विश्वकर्मा ने अपने साथियों के साथ उसके घर पहुंचकर पति को पकड़कर कुछ दूर ले गया और टंगारी से गला काटकर हत्या कर दी। उसके घर में भी आग लगा दी।
इस मामले में अदालत ने सुनवाई करते हुए दोषी मुन्ना विश्वकर्मा को उम्रकैद व एक लाख 29 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर 3 वर्ष की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अर्थदंड की धनराशि में से एक लाख रुपये मृतक उदय प्रताप कनौजिया की पत्नी लीलावती को दी जाएगी। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक-सी शशांक शेखर कात्यायन ने बहस की।