इसमें हरदी पूर्वी, सोना पहाड़ी और धुरवा-बियाडांड ब्लाक में स्वर्ण धातु, भरहरी ब्लॉक में लौह अयस्क और कुरछा ब्लॉक में ग्लूकोनाइट का खनन होना है। टेंडर की यह प्रक्रिया नवंबर तक पूरा किया जाना है। माना जा रहा है कि अन्य औपचारिकताओं के बाद नए वर्ष से खनन कार्य आरंभ होगा।
फिलहाल जिले में मुख्य रूप से गिट्टी, कोयला की खदानें हैं। इसके अलावा बालू का खनन होता है। समूचे पूर्वांचल में गिट्टी-बालू की आपूर्ति यहीं से होती है, जबकि यहां का कोयला मप्र, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब तक जाता है। अब लौह और स्वर्ण धातु के खनन के माध्यम से यहां खनन के नए क्षेत्र विकसित होंगे।
ग्लोबल टेंडर के चलते दुनिया की नामी कंपनियां इसमें शामिल होंगी। इससे जिले के विकास की नई संभावनाएं बनने की संभावना जताई जा रही है। नए खनन क्षेत्र के ही समीप म्योरपुर में एयरपोर्ट को विस्तारित करने की योजना भी इसी का हिस्सा मानी जा रही है।
आशीष कुमार, ज्येष्ठ खान अधिकारी आशीष कुमार का कहना है कि जिले के तीन ब्लॉकों में स्वर्ण धातु, एक ब्लॉक में लौह और एक ब्लॉक में ग्लूकोनाइट के खनन के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सारी प्रक्रिया निदेशालय स्तर से संचालित है। वहां से मिले निर्देशों के अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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