तापमान तेजी से बढ़ रहा है। जलस्रोत सूख रहे हैं। हैंडपंप जवाब देने लगे हैं। पानी का संकट गहराने लगा है। सबसे ज्यादा समस्या उन ग्रामीण क्षेत्रों में है, जहां पाइप लाइन से आपूर्ति की सुविधा नहीं है। ऐसे इलाकों में पानी के लिए हाहाकार मचने लगा है। कुआं, तालाब से पानी भरने को लोग विवश हैं। लोगों की चिंता इस बात की है कि फरवरी-मार्च में ही यह हाल है तो अप्रैल-मई में गुजारा कैसे होगा।
जिले के सुदुरवर्ती ग्रामीण व पहाड़ी क्षेत्रों के लोग हर साल गर्मी में पानी के संकट से जूझते हैं। शुद्ध पेयजल का इंतजाम न होने से उन्हें नदी, नालों और चुआड़ के पानी से प्यास बुझानी पड़ती है। आमतौर पर यह नौबत अप्रैल-मई के दिनों में आती है, लेकिन इस बार गर्मी के आगाज के साथ ही पानी के संकट ने चिंता बढ़ा दी है। नगवां, चतरा, कोन, चोपन, घोरावल और म्योरपुर ब्लाक के गांवों में पानी का संकट अधिक है। सदर ब्लाक में मुख्यालय से सटे कई गांवों में भी लोगों को पेयजल के लिए डिब्बाबंद पानी का सहारा लेना पड़ रहा है। जलस्तर नीचे खिसकने से शुद्ध पानी नहीं मिल रहा। दावा किया गया था कि इस बार गर्मी से पहले ही हर घर जल योजना का लाभ लोगों को मिलने लगेगा, लेकिन अभी तक कहीं पाइप लाइन तो कहीं टंकी काम ही अधूरा है। जहां यह काम हो चुके हैं, वहां टेस्टिंग की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। धंधरौल बांध में पानी का लेवल कम होने के कारण इस पर आधारित पेयजल परियोजनाओं का बुरा हाल है। आधे गांवों तक भी पानी नहीं पहुंच पा रहा।
मुख्यालय से सटे गांवों में भी रहता है संकट
गर्मी में ग्रामीण क्षेत्र तो दूर नगर पालिका और मुख्यालय से सटे आसपास के गांवों में भी पानी ढूंढना मुश्किल हो जाता है। नगर पालिका राबर्ट्सगंज के नई बस्ती, पूरब मोहाल, अंबेडकर नगर, अशोक नगर, ब्रम्हनगर समेत अन्य मोहल्ले के कई इलाके पानी के संकट से जूझते हैं। यहां टैंकर से जलापूर्ति करनी पड़ती है। वहीं बढ़ौली, उरमौरा, पुसौली, लोढ़ी, रौंप, मुसहीं, बिचपई, पोखरा, बहुअरा आदि गांव के लोग बेहाल रहते हैं। नगर पंचायत घोरावल, चोपन, चुर्क-गुर्मा, ओबरा, रेणुकूट, पिपरी, अनपरा, डाला और दुद्दी के कई मोहल्ले में पानी की समस्याएं उत्पन्न हो जाती है।
टैंकर से जलापूर्ति की तैयारी शुरू
गर्मी में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए डीएम चंद्र विजय सिंह ने डीपीआरओ को सभी ग्राम पंचायतों में टैंकरों की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। डीपीआरओ ने सभी बीडीओ को ग्राम प्रधानों और सेक्रेट्री को अविलंब टैंकरों की मरम्मत कराते हुए चालू हालत में रखने का निर्देश दिया है। डीपीआरओ का कहना है कि राबर्ट्सगंज, ओबरा, दुद्दी और घोरावल तहसील क्षेत्र के 629 ग्राम पंचायतों में एक-एक टैंकर क्रय किया गया है। पिछले साल करीब 330 गांवों में टैंकरों से पानी की आपूर्ति कराई गई थी। कहा कि जिन गांवों में पानी की किल्लत नहीं होगी वहां की टैंकरों से जरूरत के अनुसार अन्य गांवों में पेयजलापूर्ति कराई जाएगी।
कंट्रोल रूम स्थापित
पेयजल की समस्या के समाधान के लिए प्रशासन ने कंट्रोल रूम स्थापित कर दिया है। प्रतिदिन की सूचना जनपद कंट्रोल रूम 05444.224144, 7398040073 पर मंगाई जा रही है। डीपीआरओ विशाल सिंह 82993577562 इसका नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं अति संवेदनशील क्षेत्रों के लिए जल निगम ग्रामीण के अधिशासी अभियंता महेंद्र सिंह 83170753083 को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं अपर जिला पंचायत राज अधिकारी राजेश सिंह को 94158735734 कंट्रोल रूम प्रभारी बनाया गया है।