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छात्रवृत्ति से पढ़कर इसरो में वैज्ञानिक बने गगन

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अतुल माहेश्वरी छात्रवृति वाली खबर के लिए- गगन चौरसिया। - फोटो : SONBHADRA
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म्योरपुर। साधनहीन परिवार के बच्चों के सपनों को पूरा करने में छात्रवृत्ति योजनाएं किसी सौगात से कम नहीं। छात्रवृत्ति की राशि से ही पढ़कर तमाम लोग ऊंचे पदों पर पहुंचे हैं। गोविंदपुर निवासी गगन चौरसिया इसकी नजीर हैं। पिता के निधन के बाद पढ़ाई पूरा करने में छात्रवृत्ति की उनका सहारा बनी। इसरो में वैज्ञानिक गगन बेबाकी से कहते भी हैं कि अगर वनवासी सेवा आश्रम से मिलने वाली छात्रवृत्ति न होती तो वह आज इस मुकाम पर नहीं होते।
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गगन बताते हैं कि वर्ष 2005 में पिता प्रेमचंद चौरसिया की आकस्मिक मृत्यु के बाद दो भाइयों और एक बहन के लिए पढ़ना मुश्किल हो गया था। उन्होंने वर्ष 2011 में पॉलीटेक्निक की पढ़ाई पूरी कर इसरो में ज्वाइन किया था। इसके पूर्व इंटरमीडिएट की पढ़ाई के दौरान उन्हें वनवासी सेवा आश्रम के सहयोग से प्रेम भाई समिति कोष से तीन सौ रुपये प्रति माह छात्रवृत्ति के रूप में प्राप्त होता था। पॉलीटेक्निक की पढ़ाई के लिए छात्रवृत्ति के रूप में पांच सौ रुपये प्रति माह मिलने लगे। छात्रवृत्ति की मदद से गगन खुद तो बढ़े ही अपने भाई संगम को भी यूपीपीसीएल में जेई के पद तक पहुंचाया। गगन का कहना है कि डूबते को तिनके का सहारा की तरह ही छात्रवृत्ति हम जैसे तमाम लोगों के लिए महत्वपूर्ण जरिया है। इसकी मदद से हम अपने सपनों को साकार कर सकते हैं। उन्होंने अमर उजाला के नवोन्मेषक अतुल माहेश्वरी की स्मृति में दी जाने वाली छात्रवृत्ति को आदिवासी अंचल के मेधावियों के लिए बड़ा अवसर बताया।
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