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जंगली जानवरों से ग्रामीणों को बचाने के लिए नहीं हो रहा पहल

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बभनी। छत्तीसगढ़ से सटे जिले के सीमावर्ती इलाकों में जंगली जानवरों के आतंक से लोग भयभीत हैं। कभी हाथियों का झुंड उत्पात मचाता है तो कभी जंगली सुअर किसानों पर हमला बोल देते हैं। अक्सर हो रही इस तरीके की घटनाओं पर अंकुश के लिए वन विभाग की ओर से कोई खास पहल नहीं की जा रही है।बीते दिनों छत्तीसगढ़ के सेंचुरी एरिया से भटक कर आयीं जंगली हाथियों के झुंड ने सीमावर्ती इलाकों में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने छत्तीसगढ़ सहित अपने जिले के छत्तीसगढ़ सीमा से सटे रम्पाकुरर, डूमरहर, नवाटोला, मगरमांड, बिछियारी, महुआदोहर, भलपहरी, करमघट्टीसमेत अन्य गांवों के किसानों के धान, मक्का की फसलों को नुकसान पहुंचाया था। वहीं रामसागर, छोटेलाल, धनवार, बेलसिया, जगमोहन, सीताकुंवर का मकान धराशाई कर दिया। इसके साथ ही जगपतिया देवी व गुड़िया को बुरी तरह से घायल कर दिया था। हाथियों के झुंड ने 11 अक्टूबर 2019 को डूमरहर निवासी राजेंद्र प्रसाद पुत्र शिवबरन को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया था। इसके बाद से ग्रामीणों में भय था। हालांकि वर्तमान में हाथियों का आतंक समाप्त है। अब जंगली सुअरों का आतंक बढ़ने लगा है। बृहस्पतिवार को जंगली सुअर ने जौराही गांव निवासी जयनींद्र कुमार शाह पर हमला किया था जिससे उसकी मौत हो गई थी और उसका भाई मनींद्र घायल हो गया था। हाथियों की ओर से किसानों का पहुंचाए गए नुकसान की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है। जंगली जानवरों के हमले से मृत लोगों के परिजनों की आर्थिक मदद की जाती है। ग्रामीणों को जंगली जानवरों से दूरी बनाना चाहिए। जंगली जानवर कभी आ सकते हैं। वनकर्मियों की टीम जानवरों की निगरानी करती है।-अवध नारायण मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी।
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