सोनभद्र। संविदा स्वास्थ्यकर्मियों को नियमित नियुक्ति का झांसा देकर पांच लाख की ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि स्वास्थ्य महकमे के ही एक व्यक्ति ने आरोपियों से मुलाकात कराई। आरोपियों में से एक ने खुद को भाजपा नेता बताते हुए अच्छी पैठ होने का दावा किया। रुपये वापस मांगने जान से मारने की धमकी दी गई। आईजीआरएस पर शिकायत की गई तो दबाव बनाकर मैनेज कर लिया गया। मामले में एसपी अभिषेक वर्मा के निर्देश पर राॅबर्ट्सगंज पुलिस ने अनिल और आलोक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। तरावां निवासी तारा शर्मा पत्नी अजीत शर्मा ने गत 29 जून को पुलिस लाइन जाकर एसपी को प्रार्थना पत्र सौंपकर बताया था कि वह स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर कार्यरत हैं। उसके विभाग में चोपन थानाक्षेत्र के सलखन का रहने वाला पल्लव विश्वास भी काम करता है। उसने पीड़िता की मुलाकात राॅबर्ट्सगंज कोतवाली क्षेत्र के मड़रा गांव निवासी परिचित अनिल भारती और लसड़ा निवासी आलोक मिश्रा से करवाई। दोनों ने झांसा दिया कि वे उसकी स्वास्थ्य विभाग में नौकरी लगवा देंगे। अन्य संविदाकर्मियों को भी नियमित नियुक्ति का झांसा दिया। उनकी बातों पर भरोसा करते हुए पीड़िता और आर्यन ने अनिल और आलोक मिश्रा को लगभग पांच लाख रुपये दे दिए। इसमें 37 हजार रुपये कैश दिए गए। शेष रकम ऑनलाइन एप के माध्यम से भुगतान की गई। रुपये देने के बाद आरोपियों ने उन दोनों से शैक्षणिक प्रमाणपत्र मांगे। इसके बाद जनवरी 2026 तक नौकरी दिला देने का भरोसा दिया। आरोप है कि नौकरी न लगने पर जब पीड़ितों ने आरोपियों से रुपये मांगे तो गाली-गलौज की गई। जान से मारने की धमकियां दी जाने लगीं। पीड़िता ने आईजीआरएस पर शिकायत की तो उस पर दबाव बनाकर कार्य पूरा होने की बात लिखते हुए हस्ताक्षर करवा लिए गए। राबर्ट्सगंज कोतवाली प्रभारी रामस्वरूप वर्मा ने बताया कि प्रकरण में तहरीर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है।