विंढमगंज वन विभाग परिसर में चमगादड़ों की मौत का सिलसिला फिर शुरू हो गया है। पिछले दो दिनों से तापमान अधिक होने के कारण 70 से अधिक चमगादड़ों की मौत हुई है। इससे पहले मई अंत में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा था, तब सैकड़ों संख्या में चमगादड़ों की मौत हुई थी।
वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉक्टर तरुण कुमार ने चमगादड़ों के शव का सैंपल लिया है। विंढमगंज का वन विभाग परिसर सतत वाहिनी नदी के किनारे स्थित है। गर्मी के कारण नदी में पानी सूख गया है। सिर्फ एक दो जगह गड्ढे में पानी बचा है। इसी में चमगादड़ बार-बार डूब कर अपनी प्यास और शरीर के तापमान को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।
इस संबंध में वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. तरुण कुमार रवि ने बताया कि 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में चमगादड़ों के लिए जीवन का खतरा रहता है। बीते चार-पांच दिन से लगातार तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंच रहा है। इस कारण चमगादड़ों की मौत हुई। नदी में पानी नहीं है, शुद्ध पानी का न होना भी उनकी मौत की वजह हो सकता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
अखिल भारतीय लोक विज्ञान संस्थान देहरादून के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. अनिल गौतम बताते हैं कि चमगादड़ों का थर्मोरेगुलेटरी मैनेजमेंट सिस्टम मनुष्यों की तरह ही होता है। यानी, वे हमारी तरह बहुत अधिक या बहुत कम तापमान को बर्दाश्त नहीं कर पाते। चमगादड़ों की संरचना अन्य पक्षियों से भिन्न होती है। 40 डिग्री सेल्सियस तक चमगादड़ संघर्ष कर सकते हैं, इसके बाद यदि ठंडा स्थान न मिले तो मृत्यु हो सकती है। कई बार चमगादड़ों का पुराना घर उजड़ जाए तो वे नए ठिकाने में खुद को नहीं ढाल पाते। इस कारण भी एक साथ कई की मृत्यु हो जाती है।