मौसम में बदलाव के बीच इन दिनों बीमारियों का कहर तेज है। ज्यादातर लोगों को सर्दी-खांसी, बुखार, पेट दर्द जैसी समस्या है। लोग इसे सामान्य बीमारी या वायरल इंफेक्शन मानकर खुद से ही दवा ले ले रहे हैं। कई को तो इससे राहत मिल रही है लेकिन दवाओं के सेवन में यह बेपरवाही बीमारी को गंभीर स्थिति में भी पहुंचा दे रही है। हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने भी आए हैं।
सर्दी-बुखार जैसी सामान्य दिक्कत होने पर ज्यादातर लोग खुद से ही दवा खरीदकर सेवन कर लेते हैं। उन्हें न तो अपनी बीमारी की गंभीरता का अंदाजा होता है और न ही दवा की डोज का। इसके चलते कई बार बीमारी से तात्कालिक राहत तो मिल जाती है लेकिन उसका सेहत पर गहरा असर होता है। कोरोना काल में ऐसे कई मामले सामने भी आए, जिसमें खुद से डॉक्टर बनने के चक्कर में कइयों को अपनी या अपने प्रियजनों की जान भी गंवानी पड़ी।
कुछ ऐसी ही स्थिति इन दिनों मौसम के बदले मिजाज के बाद से है। वायरल बुखार के साथ मलेरिया, टायफाइड, डेंगू के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ठंड लगना, सिर दर्द, बदन दर्द, बेचैनी, पेट दर्द जैसे लक्षण एक जैसा होने से अधिकांश लोग इसमें अंतर नहीं कर पाते। लिहाजा कौन सी दवा कितनी मात्रा में लेनी है, इसकी जानकारी किए बगैर वह दवाओं का सेवन करते जा रहे हैं।
मेडिकल स्टोर संचालक भी अपने अनुभव के आधार पर दवाएं थमा देते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ती प्रवृत्ति घातक हो सकती है। बेहतर होगा कि बीमारी के सामान्य लक्षण दिखेन पर जांच कराएं और उचित दवा का ही सेवन करें।
दर्द और बुखार की दवाएं इन दिनों लोग बेमतलब भी इस्तेमाल करने लगे हैं। हल्का दर्द भी होने पर मेडिकल स्टोर से दवाएं मंगाकर उसका सीधा इस्तेमाल कर रहे हैं। वह दवाइयां तुरंत तो आराम दे रहीं है लेकिन उसकी वजह से लोगों को लंबे समय तक बीमार रहना पड़ रहा है और मुख्य बीमारी की जानकारी होने में देरी हो रही है। बेहतर यही है कि लक्षण के आधार पर जांच कराएं और डॉक्टर के परामर्श से सही दवा लें। - डॉ. बीके सिंह, संयुक्त चिकित्सालय, अनपरा।
वायरल बुखार और मलेरिया-टायफाइड दोनों के अधिक लक्षण एक समान होते हैं। लोग लक्षण दिखने पर भी चिकित्सकों के पास जाने से बचते हैं। इससे शुरुआती दौर में ही बीमारी का पता नहीं लग पाता और परामर्श के बाद लोगों को ठीक होने में लंबा समय लग जाता है। इस मौसम में कोई भी दवा बिना चिकित्सकीय परामर्श के न लें। - डॉ. अभय कुमार दुबे, फिजिशियन, रेणु पावर हॉस्पिटल।