रेणुकूट। नगर में करीब पांच दशक पहले जिला पंचायत द्वारा आवंटित दुकानदारों को नोटिस मिलने से हड़कंप मचा है। दुकानदारों का कहना है कि जिला पंचायत द्वारा उन्हें नए अनुबंध के लिए कहा जा रहा है जो उचित नहीं है। बृहस्पतिवार को व्यापारियों ने व्यापार मंडल अध्यक्ष अजय राय की अगुवाई में बैठक कर नोटिस का विरोध किया और पुराने शर्तों पर ही अनुबंध जारी रखने की बात कही। व्यापार मंडल अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि नगर में लगभग 60 दुकानें वर्ष 1971 में जिला पंचायत द्वारा आवंटित की गई थीं। उस समय दुकानदारों से जमानत धनराशि जमा करा कर प्रतिमाह किराया निर्धारित करके अनुबंध किया गया था। 1997 में जब इरकान कंपनी द्वारा सड़क निर्माण किया गया तो सड़क चौड़ीकरण के दौरान जिला पंचायत की आवंटित दुकानें टूट गईं। इस दौरान लोक निर्माण विभाग द्वारा दुकानों को कोई प्रतिपूर्ति राशि भी नहीं दी गई जिससे वे अपना दुकानों का नया निर्माण करा सकें। किसी तरह दुकानदारों ने अपने पैसे लगाकर दुकान मरम्मत कराया। उसी में दुकान चलाते रहे और अपना निर्धारित किराया भी जमा करते रहे। अब लंबे समय बाद नोटिस मिलने से दुकानदारों में हड़कंप मचा हुआ है। जिला पंचायत की नोटिस में लिखा है कि दुकानदारों को नया अनुबंध करना पड़ेगा अब दुकानदारों को भय सता रहा है कि कोरोना काल मे वैसे ही उनकी दुकानदारी खराब हो गई है और अब जिला पंचायत के नए फरमान से व्यापारियों की परेशानी बढ़ा दी है। बैठक में अजय राय ने जिला पंचायत अध्यक्ष अमरेश पटेल से बात की और नोटिस के संबंध में अपनी बात रखी। जिला पंचायत अध्यक्ष ने व्यापारियों को जिला मुख्यालय पर दो दिन बाद बैठक के लिए बुलाया है। इस दौरान नगर पंचायत अध्यक्ष निशा सिंह, पांचू गिरी, अखिलेश यादव, बृजकिशोर, संजय चौरसिया, आशीष श्रीवास्तव, सुभाष कपूर, डॉ अरुण गुप्ता, सत्यनारायण अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।