दुद्धी। अमवार में नवनिर्मित पंचमुखी हनुमान मंदिर के निर्माण के बाद श्रम विभाग की ओर से नोटिस भेजने पर विवाद खड़ा हो गया है। विभाग ने कनहर परियोजना की कार्यदायी संस्था एचईएस को जारी नोटिस में मंदिर निर्माण में आए खर्च का आंकलन करते हुए उसका एक प्रतिशत सेस जमा करने का निर्देश दिया है। उधर, संस्था के अफसरों का कहना है कि मंदिर का निर्माण जनसहयोग से हुआ है, लिहाजा सेस लिया जाना उचित नहीं है।
निर्माणाधीन कनहर बांध के समीप ही दक्षिण भारतीय शैली में भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है। रविवार को मंदिर में पंचमुखी हनुमानजी के प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। कनहर बांध का निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था से जुड़े अफसरों-कर्मचारियों ने इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अनुष्ठान होने के बाद श्रम प्रवर्तन अधिकारी ने कार्यदायी संस्था एचईएस को नोटिस थमा दिया। इसमें मंदिर निर्माण में आए छह करोड़ रुपये का खर्च दर्शाते हुए इसका एक प्रतिशत सेस के रूप में विभाग में जमा कराने के निर्देश दिया है। मंदिर निर्माण पर टैक्स लगाने से लोगों में असंतोष है। कार्यदायी संस्था एचईएस के जीएम संजीव कुमार व सत्यनारायण राजू ने कहा कि श्री पंचमुखी हनुमानजी का मंदिर ट्रस्ट की ओर से जन सहयोग से बनाया गया है। इस मंदिर निर्माण में कंपनी और कनहर सिंचाई विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों सहित क्षेत्रीय लोगों ने सहयोग किया है। उधर, श्रम प्रवर्तन अधिकारी दुद्धी रामकुमार ने कहा कि अमवार में मंदिर निर्माण करीब छह करोड़ की लागत से हुआ है। करीब तीस मजदूरों से काम कराया गया है। नियमानुसार कंपनी से सेस जमा कराने को कहा गया है।