ओबरा। ऑल इंडिया पॉवर इंजीनियर्स फेडरेशन ने इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2020 के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराते हुए केंद्र सरकार से बिल वापस लेने की मांग की है। फेडरेशन ने केंद्रीय विद्युत मंत्री आरके सिंह को भेजे गए पत्र में मांग की है कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय बिल वापस नहीं लेता है तो इसे सीधे संसद में रखने की बजाए व्यापक विचार - विमर्श के लिए पहले संसद की बिजली मामलों की स्टैंडिग कमेटी में भेजा जाए। स्टैंडिग कमेटी के सामने सभी स्टेक होल्डर्स खास तौर से उपभोक्ताओं और बिजली कर्मियों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने की मांग भी की है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बताया कि संगठन की तरफ से पांच जून तक भेजे जाने वाले अपनी टिप्पणी में कहा गया है कि अमेंडमेंट बिल के जरिए देश के बिजली कानूनों में भारी बदलाव किया जा रहा है। फेडरेशन की तरफ से यह आरोप भी लगाया गया है कि केंद्र सरकार ने केंद्र शासित प्रांतों में बिजली वितरण के बाबत निजीकरण के लिए आदेश जारी कर दिया है, जिसका बिल में कोई उल्लेख भी नहीं है। इससे यह प्रतीत होता है कि केंद्र सरकार बिजली के निजीकरण के लिए जल्दी में है। फेडरेशन के चेयरमैन ने बताया कि देश के नौ प्रांतों ने बिल के कई प्रावधानों का विरोध करते हुए केंद्र सरकार को अपनी टिप्पणी भेज दी है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि बिल में कहा गया है कि केंद्र सरकार एक नए प्राधिकरण का गठन करेगी। जिसके पास यह अधिकार होगा कि राज्यों की बिजली वितरण कंपनियां यदि निजी क्षेत्र के बिजली उत्पादन घरों के भुगतान के लिए अग्रिम लेटर ऑफ क्रेडिट नहीं खोलेंगी तो राज्य को मिलने वाली बिजली केंद्रीय लोड डिस्पैच स्टेशन रोक देगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य राज्यों को निजी कंपनियों से महंगी बिजली खरीदने को मजबूर करना है।